Former IAS IFS Officers Support SIREC: देश के 124 पूर्व पूर्व आईएएस और आईएफएस सहित अन्य संबंधित सेवाओं के अफसरों ने भारत के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है।

उन्होंने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का समर्थन किया है। साथ ही चुनावों में कथित धांधली को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए। पत्र में उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण होना जरूरी है।
Do you doubt the system, or do you only doubt the result?
In an unsparing open letter, 124 former IAS, IFS, and Allied Service officers have defended the Election Commission of India and statutory roll revisions like the Special Intensive Revision. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। Their message directly calls… pic.twitter.com/kVvxtnut4y
— Smriti Z Irani October 10, 2026
बूथ कैप्चरिंग, फर्जी मतदान, चुनावी हिंसा जैसी घटनाएं कम हुईं
पत्र में अधिकारियों ने भारतीय चुनाव प्रणाली में आए बदलावों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि एक समय देश में बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों में फर्जी मतदान और चुनावी हिंसा जैसी घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन अब चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर व्यवस्थाएं लागू हैं।
इनमें पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी, EVM की सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और VVPAT के जरिए सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
बिहार में मतदान का प्रतिशत 1951 के बाद सबसे अधिक रहा
पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इस चुनाव में किसी भी मतदान केंद्र पर दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
उन्होंने कहा कि यहां का मतदान प्रतिशत 1951 के बाद सबसे अधिक रहा। उन्होंने चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने के साथ तथ्यों और प्रमाणों के महत्व पर जोर दिया।



