माफिया अतीक अहमद के बेटे आबान की दुर्घटनाग्रस्त कार में मशहूर रूसी उपन्यासकार दोस्तोवस्की की कई किताबें मिली हैं. हादसे में अतीक के बेटे आबान की मौत हो गयी. वह झांसी जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था. कहा जा रहा है कि कार में रखी किताबें भी आबान भाई के लिए ले जा रहा था. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि आखिर कौन थे दोस्तोवस्की? आखिर दोस्तोवस्की के उपन्यास भारत में क्यों पढ़े जा रहे हैं? वे किन विषयों पर लिखते थे?

फ्योदोर दोस्तोवस्की रूस के महान उपन्यासकारों में गिने जाते हैं. उनका जन्म 11 नवंबर 1821 में तथा निधन 9 फरवरी साल 1881 में हुआ. उन्होंने ऐसे उपन्यास लिखे, जिनमें मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष दिखाई देते हैं. भारत में दोस्तोवस्की को बहुत रुचि से पढ़ा जाता है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि उनके विषय किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं. गरीबी, अपराध, प्रेम, ईर्ष्या, अकेलापन, धर्म, नैतिकता और मानसिक तनाव हर समाज में दिखाई देते हैं.

दोस्तोवस्की के पात्र अक्सर कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं. वे सही और गलत के बीच उलझते हैं. वे अपने फैसलों से लड़ते हैं. कई बार वे समाज से भी संघर्ष करते हैं. भारतीय पाठकों को यह संघर्ष अपने जीवन से जुड़ा हुआ लगता है. भारत में साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन नहीं माना जाता. साहित्य जीवन को समझने का माध्यम भी है. दोस्तोवस्की के उपन्यास मनुष्य के मन की गहराइयों में उतरते हैं. इसलिए विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और सामान्य पाठक उन्हें पढ़ना पसंद करते हैं.

फ्योदोर दोस्तोवस्की रूस के महान उपन्यासकारों में गिने जाते हैं.

भारतीय पाठकों से दोस्तोवस्की का रिश्ता

भारत एक विविधता वाला देश है. यहां गरीबी और अमीरी साथसाथ दिखाई देती है. यहां परंपरा और आधुनिकता के बीच भी संघर्ष रहता है. जाति, वर्ग, धर्म और सामाजिक असमानता जैसे प्रश्न आज भी महत्वपूर्ण हैं. दोस्तोवस्की के उपन्यासों में भी समाज की असमानता दिखाई देती है. उनके कई पात्र गरीब होते हैं. कुछ लोग सम्मान की तलाश में रहते हैं. कुछ पात्र धन और शक्ति के पीछे भागते हैं.

कुछ लोग अपने ही विचारों के कारण दुखी रहते हैं. भारतीय समाज में परिवार का महत्व बहुत अधिक है. दोस्तोवस्की के उपन्यासों में परिवार भी एक महत्वपूर्ण संस्था है. परिवार प्रेम देता है, लेकिन परिवार में तनाव, दबाव और टकराव भी होता है. उनके पात्र परिवार से जुड़ना चाहते हैं. दोस्तोवस्की धर्म और नैतिकता के प्रश्नों को भी उठाते हैं. भारत में आध्यात्मिक और नैतिक विचारों की लंबी परंपरा है. इसलिए उनके उपन्यासों में उठाए गए प्रश्न भारतीय पाठकों को गहराई से प्रभावित करते हैं.

दोस्तोवस्की की किताबें.

दोस्तोवस्की के पांच प्रसिद्ध उपन्यास कौन से हैं?

  • अपराध और दंड: इस उपन्यास का रूसी नाम क्राइम एंड पनिशमेंट है. यह दोस्तोवस्की का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास माना जाता है. इसका मुख्य पात्र रास्कोलनिकोव एक गरीब विद्यार्थी है. वह मानता है कि कुछ असाधारण लोगों को सामान्य नैतिक नियमों से ऊपर रहने का अधिकार है. इसी विचार के कारण वह एक वृद्ध साहूकार की हत्या कर देता है. हत्या के बाद उसका मन उसे शांति नहीं लेने देता. वह बाहर से सामान्य दिखने की कोशिश करता है. लेकिन भीतर से टूटने लगता है. अपराध के बाद उसका मानसिक संघर्ष उपन्यास का मुख्य आधार है. यह उपन्यास बताता है कि अपराध का दंड केवल कानून नहीं देता. मनुष्य का अपना विवेक भी उसे दंड देता है.
  • करमाज़ोव बंधु: यह दोस्तोवस्की का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण उपन्यास है. यह एक परिवार की कहानी है. इस परिवार में पिता और उसके तीन बेटों के बीच गहरे मतभेद हैं. पिता स्वार्थी और भोगवादी है. तीनों बेटों का स्वभाव अलगअलग है. एक भावुक है. दूसरा तर्कवादी है. तीसरा धार्मिक और शांत स्वभाव का है. उपन्यास में पिता की हत्या हो जाती है. इसके बाद संदेह, ईर्ष्या और अपराध की स्थिति पैदा होती है. साथ ही, उपन्यास ईश्वर, स्वतंत्र इच्छा, नैतिक जिम्मेदारी और विश्वास जैसे प्रश्न उठाता है. यह उपन्यास परिवार की कहानी के साथ मनुष्य की आत्मा की कहानी भी है.
  • मूर्ख: इस उपन्यास का अंग्रेजी नाम द इडियट है. इसका मुख्य पात्र प्रिंस मिश्किन है. वह सरल, दयालु और ईमानदार व्यक्ति है. समाज उसे मूर्ख समझता है. इसका कारण यह है कि वह चालाकी नहीं करता. वह लोगों के प्रति विश्वास रखता है. वह दूसरों के दुख को समझता है. लेकिन जिस समाज में स्वार्थ, धन और दिखावा अधिक हो, वहां सच्ची अच्छाई भी समस्या बन जाती है. मिश्किन के कारण कई लोगों के जीवन में बदलाव आता है. फिर भी वह स्वयं दुख और असफलता का सामना करता है. उपन्यास यह प्रश्न पूछता है कि क्या एक अच्छा और निष्कपट व्यक्ति भ्रष्ट समाज में जीवित रह सकता है?
  • दानव: इस उपन्यास का अंग्रेजी नाम डेमोन्स है. उपन्यास में राजनीतिक विचारों, कट्टरता और हिंसा का प्रभाव दिखाया गया है. कुछ लोग समाज को पूरी तरह बदलना चाहते हैं. वे पुराने मूल्यों को नष्ट करना चाहते हैं, लेकिन उनके विचार धीरेधीरे हिंसा और अराजकता में बदल जाते हैं. यह उपन्यास बताता है कि जब कोई विचार अंधे विश्वास में बदल जाता है, तब वह विनाश पैदा कर सकता है.
  • गरीब लोग: यह दोस्तोवस्की का पहला उपन्यास था. इसमें गरीब लोगों के जीवन और उनकी भावनाओं को दिखाया गया है. उपन्यास पत्रों के रूप में लिखा गया है. दो गरीब पात्र एकदूसरे को पत्र लिखते हैं. उनके पत्रों में प्रेम, गरीबी, सम्मान और अकेलेपन की भावना दिखाई देती है. इस रचना से स्पष्ट होता है कि दोस्तोवस्की शुरू से ही सामान्य और दबे हुए लोगों के जीवन में रुचि रखते थे.

कैसी है दोस्तोवस्की की लेखन शैली?

दोस्तोवस्की की भाषा गंभीर और विचारपूर्ण है. उनके लंबे संवाद बहुत प्रसिद्ध हैं. पात्र एकदूसरे से बहस करते हैं. वे अपने विचारों का बचाव करते हैं. वे अपने विश्वास पर सवाल भी उठाते हैं. उनकी कहानियों में घटनाएं अचानक बदल सकती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कोई हत्या हो सकती है. कोई रहस्य सामने आ सकता है. कोई पात्र अपना विचार बदल सकता है. इससे कथानक में तनाव बना रहता है. उनके उपन्यासों में कई आवाजें सुनाई देती हैं. हर पात्र की अपनी सोच होती है. लेखक किसी एक विचार को अंतिम सत्य की तरह प्रस्तुत नहीं करते. वे पाठक को सोचने का अवसर देते हैं.

क्या आज भी प्रासंगिक हैं दोस्तोवस्की?

आज मनुष्य तकनीक से जुड़ा हुआ है. फिर भी वह अकेला महसूस करता है. लोग सफलता चाहते हैं. लेकिन मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है. अपराध, हिंसा, असमानता और राजनीतिक कट्टरता आज भी मौजूद हैं. इसलिए दोस्तोवस्की के उपन्यास आज भी प्रासंगिक हैं. उनके पात्र हमें बताते हैं कि मनुष्य केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं बनता. उसके विचार, डर, इच्छाएं और अपराधबोध भी उसके जीवन को प्रभावित करते हैं. दोस्तोवस्की को पढ़ना मानव मन को पढ़ना है. उनके उपन्यास हमें आसान उत्तर नहीं देते. वे कठिन प्रश्न सामने रखते हैं. यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.