मणिपुर के हिंसा प्रभावित पहाड़ी जिलों में रविवार को भी तनाव की स्थिति बनी हुई है. हाल ही में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़पों में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 9 हो गई है. इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने नागरिकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों निर्देश दिए हैं कि हालात को जल्द से जल्द नियंत्रण में लाएं. उन्होंने नागरिकों की हत्या और हिंसा की निंदा की है.

हिंसा की ये ताजा घटनाएं मुख्य रूप से राज्य के पहाड़ी जिलों कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी में शुक्रवार और शनिवार के दौरान हुईं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जिसमें लोगों की जान चली गई. बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कामजोंग जिला प्रशासन ने कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. हिंसा प्रभावित संवेदनशील इलाकों और गांवों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
मुख्यमंत्री खेमचंद ने की हिंसा की निंदा
इधर बिगड़ते हालात पर मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने चिंता जाहिर की है. उन्होंने सोशल मीडिया एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘मैं निर्दोष नागरिकों की हत्या और हिंसा की निंदा करता हूं. मैंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर नियंत्रण पाने, शांति और कानूनव्यवस्था बहाल करने तथा सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं’. उन्होंने सभी समुदायों से स्थिति को शांत करने के लिए संयम बरतने और शांति, संवाद तथा सद्भाव को प्राथमिकता देने की अपील की.
हिंसा प्रभावित जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात
वहीं अधिकारियों ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सबसे अधिक प्रभावित कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए हैं. चप्पेचप्पे पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है और चारों तरफ नजर रखी जा रही है.
शुक्रवार रात पांच बच्चों की मां की हत्या
दरअसल शुक्रवार रात को पांच बच्चों की मां की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. यह घटना नगा बहुल कामजोंग जिले के कुकी बहुल चसाद गांव में हुई. इस 22 साल महिला की हत्या के बाद कुकी और नगा सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही. इस झड़प में 42 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई. वहीं 10 मकानों में आग लगा दी गई. हिंसा की आगे की घटनाओं को रोकने के लिए गांव में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता BNSS) की धारा 162 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है.
संदिग्ध उग्रवादियों ने किया हमला
अधिकारियों ने बताया कि चसाद की घटना के बाद शनिवार को कांगपोकपी जिले के तापन और मकुई गांवों में संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला किया. इस दौरान नगा समुदाय के दो ग्राम रक्षकों एम. दैमाई और आर. गंगमेई तथा रिंगकांगमाई नामक एक अन्य शख्स की मौत हो गई.नगा समुदाय के एक नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर ने यह भी दावा किया कि एक ग्रामीण अजिनबोउ आर. का उग्रवादियों ने सिर कलम कर दिया. संगठन ने सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए उनका कटा सिर लौटाने की मांग की.
म्यांमा की ओर भागे हमलावर
अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को संदिग्ध उग्रवादी कामजोंग जिले में भारतम्यांमा सीमा के पास तंगखुल नगा समुदाय की बस्ती निंगचौ गांव में भी घुस गए और गोलीबारी की. इस घटना में 35 साल के नगाचांसो निंगशेन और 48 साल के लेइशिशान लेइशादांग की मौत हो गई.घटना के बाद सुरक्षा बल गांव पहुंचे. स्थानीय लोगों का दावा है कि गोलीबारी करने के बाद हमलावर म्यांमा की ओर भाग गए.
कार में शख्स को मारी गोली
उखरुल जिले में शनिवार को संदिग्ध उग्रवादियों ने चेपू याओलेन गांव के पास एक कार पर गोलीबारी की. गोलीबारी में 40 साल के संदीप राय की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि संदीप जिस कार को चला रहे थे, उसी के अदर उनकी मौत हो गई. वहीं कांगपोकपी जिले के मकुई अशांग और तापन में भी सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी की सूचना है.
अबतक 40 से ज्यादा लोगों की मौत
इस साल फरवरी से कुकी और नगा जनजातीय समुदायों के बीच जारी हिंसा में अबतक 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई मकानों को आग लगा दी गई है. इससे पहले राज्य में इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और आसपास की पहाड़ियों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा हुई थी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे.



