चंबा। कहते हैं बहन का रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि हर मुश्किल में साथ खड़े रहने का नाम है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह क्षेत्र में इस रिश्ते की ऐसी ही मिसाल देखने को मिली है। यहां 28 वर्षीय ललिता कुमारी की दोनों किडनियां फेल होने के बाद जिंदगी मुश्किल हो गई थी। ऐसे वक्त में उसकी बड़ी बहन राधा ने अपनी एक किडनी देकर न सिर्फ बहन का साथ निभाया, बल्कि उसे जिंदगी दी है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।

12 घंटे चला किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई और इलाज की प्रक्रिया पूरी करने में करीब 8 महीने लग गए। इसके बाद बीते सोमवार को टांडा मेडिकल कॉलेज में ललिता का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम ने करीब 12 घंटे तक लगातार ऑपरेशन किया।
आखिरकार ऑपरेशन सफल रहा। फिलहाल दोनों बहनें, यानी किडनी देने वाली राधा और किडनी लेने वाली ललिता, डॉक्टरों की निगरानी में हैं और दोनों की हालत ठीक बताई जा रही है।
पैसों की कमी बनी बड़ी परेशानी, लोगों ने की मदद
ललिता के परिवार की आर्थिक हालत काफी कमजोर है। इलाज में परिवार की सारी जमा पूंजी पहले ही खर्च हो चुकी थी। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट का महंगा खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल था।
इसके बाद हिमाचल के कई लोगों ने क्राउडफंडिंग यानी जन-सहयोग के जरिए परिवार की आर्थिक मदद की। लोगों की इस मदद से परिवार को इलाज आगे बढ़ाने की उम्मीद मिली।
दिनेश कुमार ने 8 महीने तक परिवार का दिया साथ
ललिता के इलाज के इस मुश्किल सफर में समाजसेवी दिनेश कुमार, जिन्हें लोग ‘हिमाचल वाला भाऊ’ के नाम से भी जानते हैं, ने भी परिवार का साथ दिया। दिनेश पिछले करीब 8 महीने से लगातार ललिता के परिवार और डॉक्टरों के संपर्क में रहे। उन्होंने इलाज से जुड़ी जानकारी जुटाने के साथ-साथ परिवार के लिए आर्थिक मदद जुटाने में भी अहम भूमिका निभाई।
खुद ट्रांसप्लांट करा चुके हैं दिनेश, बताया आगे का सफर
खास बात यह है कि दिनेश कुमार खुद भी किडनी ट्रांसप्लांट के दौर से गुजर चुके हैं। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद असली चुनौती शुरू होती है। ऑपरेशन के बाद मरीज को कई महीनों तक महंगी दवाइयां और इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। इसलिए ललिता को पूरी तरह स्वस्थ होने तक समाज के सहयोग और लोगों की दुआओं की जरूरत रहेगी।



