डीजे की बीट्स पर थिरकना ज्यादातर लोगों को अच्छा लगता है. दशहरा पर भी कई जगहों पर धमाकेदार साउंड सिस्टम लगा दिए जाते हैं. ऐसे में कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए. डीजे की तेज और धमकदार आवाज के साथ ही बहुत ज्यादा शोर के संपर्क में आने से हार्ट से लेकर ब्रेन तक पर असर हो सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कई बार इससे स्थिति गंभीर भी हो जाती है. आज के समय में सिर्फ पानी, मिट्टी और हवा में ही पॉल्यूशन नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी हमारे कानों से लेकर ओवरऑल हेल्थ को इफेक्ट करता है. इस आर्टिकल में जानेंगे कि तेज आवास से दिल समेत किन अंगों को नुकसान पहुंच सकता है.

तेज आवाज हमारे शरीर में तनाव पैदा करती है. आपने भी महसूस किया होगा कि जब आप कहीं तेज साउंड सिस्टम के पास खड़े होते हैं तो गले से लेकर दिल तक पर वाइब्रेशन महसूस होता है. ऐसे में आपकी हार्ट बीट बढ़ सकती है और मानसिक स्वास्थ पर भी असर पड़ता है. चलिए जान लेते हैं एक्सपर्ट से इस बारे में डिटेल के साथ.
तेज आवाज का दिल पर असर
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी और कार्डिक सर्जरी डॉक्टर अंकेश अग्रवाल ने बताया कि तेज आवाज की वजह से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है. इस कारण हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर में टेम्परेरी बढ़ोत्तरी हो सकती है. अचानक बीपी और दिल की धड़कन बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है.
दिमाग पर भी होता है असर
एक्सपर्ट का कहना है कि तेज आवाज का असर आपके दिमाग पर भी होता है, जिससे मानसिक स्वास्थ अफेक्ट हो सकता है. इससे सिरदर्द होने, बैचैनी महसूस होने लगना, फोकस में कमी आना, चिड़चिड़ापन और नींद न आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. तेज आवाज के साथ गी अदक लगातार कंपन वाली बीट्स भी हो तो इसके संपर्क में आने पर कुछ लोगों को तुरंत घबराहट और असहजता भी होने लगती है. ऐसी स्थिति में तुरंत वहां से हटना चाहिए और सही महसूस न हो तो डॉक्टर से मिलें.
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ये लोग बरतें ज्यादा सावधानी
डॉक्टर अंकेश अग्रवाल का कहना है कि जिन लोगों को पहले से ही दिल से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें ज्यादा शोर, हैवी म्यूजिक से दूर रहना चाहिए. इसके अलावा बच्चों, बीमार लोगों और बुजुर्ग भी तेज आवाज के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं. उनको इससे काफी ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है. ऐसे में ज्यादा ध्यान रखें.
ये लक्षण न करें नजरअंदाज
डॉक्टर कहते हैं कि डीजे या स्पीकर्स की आवाज को निर्धारित सीमा में रखने के लिए जरूरी कदम उठाना चाहिए. लोगों को खुद भी सावधानियां बरतनी चाहिए जैसे तेज आवाज वाले स्पीकर के पास बिल्कुल भी खड़े न हों और जहां बहुत लाउड शोर हो वहां ज्यादा देर तक न रहें. इसके अलावा अगर कानों में लगातार घंटी बजने जैसा महसूस हो सुनाई कम दे या सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करें. इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज करना बेहद नुकसानदायक हो सकता है.
ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य
में दिए एक लेख के मुताबिक, जब हम 5565 dB के मध्यम ध्वनि स्तर के लगातार संपर्क में रहते हैं तो इससे तंत्रिका संबंधी समस्याओं सहित कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं. उच्च तीव्रता वाले शेर को लेकर चूहों पर अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 10 दिनों तक रोजाना 1 घंटे तक 100 Db शोर के संपर्क में रहने के कारण चूहों में एंग्जायटी रिलेटेड बिहेवियर बढ़ा.



