Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. फिल्मों की कहानी की तर्ज पर बालाघाट में पिछले 17 वर्षों से फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर सरकारी डॉक्टर की नौकरी कर रहे पूर्व ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील कुमार सिंह का भांडाफोड़ हुआ है. पांच महीने तक चली लंबी और गहन जांच के बाद डॉ. सुनील सिंह की एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह फर्जी व कूटरचित पाया गया. राज्य शासन से आदेश मिलते ही बिरसा थाना पुलिस ने आरोपी पूर्व बीएमओ के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है.

स्वास्थ्य महकमे में हुई इस बड़ी धांधली का घटनाक्रम 17 साल पुराना बताया जा रहा है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दहिया के अनुसार, डॉ. सुनील कुमार सिंह की नियुक्ति वर्ष 2009 में संविदा आधार पर हुई थी. वर्ष 2012 में उन्हें नियमित कर दिया गया और वर्ष 2023 में उन्हें बिरसा विकासखंड के खंड चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया. बीएमओ बनने के बाद उनकी शैक्षणिक योग्यताओं और रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी.
5 माह की जांच में खुला फर्जीवाड़ा
शिकायत मिलने के बाद राज्य स्तर की टीम द्वारा पिछले पांच महीनों से मामले की जांच की जा रही थी. राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट में डॉ. सुनील सिंह की एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल पंजीयन दोनों फर्जी साबित हुए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। शासन के निर्देश पर बिरसा थाने में मामला पंजीकृत किया गया है. दस्तावेज सत्यापन पर उठे सवाल: इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों की भर्ती, नियमितीकरण और पदोन्नति के समय होने वाले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
तीन साल पहले मिली ‘क्लीन चिट’ पर भी घिरे विभागीय अधिकारी
इस फर्जीवाड़े में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह सामने आया है कि तीन साल पहले भी सुनील सिंह की डिग्री को लेकर शिकायत दर्ज हुई थी. उस समय हुई विभागीय जांच में आरोपी को संदिग्ध रूप से ‘क्लीन चिट’ दे दी गई थी. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर तीन साल पहले हुई जांच में फर्जीवाड़े को कैसे दबाया गया और किनकिन अधिकारियों ने इसमें ढिलाई बरती. पुलिस अब इस कोण से भी जांच आगे बढ़ा सकती है.



