सिक्किम कैडर के IAS आंजनेय कुमार सिंह उत्तर प्रदेश से कार्यमुक्त हो गए हैं. वे मुरादाबाद मण्डल के कमिश्नर पद पर लंबे समय से तैनात थे. साल 2015 में सिक्किम से डेपुटेशन पर उत्तर प्रदेश आए थे. उन्हें आठवीं बार डेपुटेशन पर यूपी में रहने की अनुमति नहीं मिली. आंजनेय की उत्तर प्रदेश में इतनी लंबी नियुक्ति केंद्र और राज्य सरकारों की सहमति से जरूर रही लेकिन उनके लिए नियमकानून शिथिल किये गए. सामान्य दशा में कोई भी डेपुटेशन पांच साल तक हो सकता है. जनहित में इसे दो साल तक और बढ़ाया जा सकता है. आइए, आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह के बहाने समझते हैं कि डेपुटेशन के मामले में भारत सरकार और राज्य सरकारों के नियम कानून क्या हैं?

भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा है. इस सेवा के अधिकारी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों दोनों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हैं. कई बार प्रशासनिक आवश्यकताओं या जनहित को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को डेपुटेशन पर भेजा जाता है अथवा उनके कार्यकाल का विस्तार भी किया जाता है. सेवा विस्तार और प्रतिनियुक्ति को लेकर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी के स्पष्ट दिशानिर्देश तय हैं.
डेपुटेशन क्या है और यह कैसे काम करता है?
आईएएस अधिकारियों का चयन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा होता है. चयन के बाद उन्हें एक विशेष राज्य कैडर आवंटित किया जाता है. जब कोई अधिकारी अपने मूल कैडर से बाहर केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था में सेवा देता है, तो इसे डेपुटेशन यानी प्रतिनियुक्ति कहा जाता है.
अखिल भारतीय सेवा कैडर नियम 1954 के नियम 6 के तहत प्रतिनियुक्ति का प्रावधान किया गया है. इसके लिए संबंधित राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की सहमति आवश्यक होती है. यदि दोनों सरकारों के बीच कोई असहमति होती है, तो केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम माना जाता है.
IAS आंजनेय कुमार सिंह.
सेंट्रल डेपुटेशन की सामान्य समयावधि क्या है?
केंद्र सरकार में विभिन्न स्तर के पदों के लिए डेपुटेशन की एक निश्चित अवधि निर्धारित होती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सामान्य तौर पर यह अवधि पद के स्तर पर निर्भर करती है.
- अवर सचिव या उप सचिव स्तर पर सामान्य कार्यकाल चार वर्ष का होता है.
- निदेशक स्तर पर प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच वर्ष तक होती है.
- संयुक्त सचिव स्तर पर सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष तय होता है.
- अतिरिक्त सचिव स्तर पर कार्यकाल सामान्यतः चार वर्ष का होता है.
- सचिव स्तर पर अधिकारी सेवानिवृत्ति तक या केंद्र के विवेकानुसार कार्य करते हैं.
डेपुटेशन के दौरान सेवा विस्तार के क्या हैं नियम?
नियमों के अनुसार डेपुटेशन की अवधि को अनिश्चित काल के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता. सामान्य परिस्थितियों में निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद अधिकारी को अपने मूल कैडर में लौटना पड़ता है. हालांकि, विशेष परिस्थितियों में कार्यकाल विस्तार यानी टेन्योर एक्सटेंशन दिया जा सकता है. संयुक्त सचिव स्तर तक के पदों पर सामान्य कार्यकाल के बाद एक वर्ष का विस्तार संबंधित मंत्रालय की सिफारिश और डीओपीटी की मंजूरी से संभव होता है. यदि विस्तार दूसरे वर्ष के लिए भी आवश्यक हो, तो इसके लिए कैबिनेट की नियुक्ति समिति यानी एसीसी की विशेष स्वीकृति अनिवार्य होती है. सामान्यतः किसी भी पद पर कुल डेपुटेशन अवधि सात वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जाती.
इंटरकैडर डेपुटेशन और उसके नियम भी जानें
जब कोई आईएएस अधिकारी अपने आवंटित राज्य कैडर से किसी दूसरे राज्य में प्रतिनियुक्ति पर जाता है, तो उसे इंटरकैडर डेपुटेशन कहा जाता है. यह सुविधा केवल असाधारण व्यक्तिगत परिस्थितियों में दी जाती है, जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या या पतिपत्नी दोनों का अखिल भारतीय सेवा में होना. इंटरकैडर डेपुटेशन की अधिकतम सीमा सामान्यतः पांच वर्ष होती है. इसे पहले तीन साल के लिए दिया जाता है और बाद में दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है. पांच वर्ष से अधिक का विस्तार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होता. हालांकि, आंजनेय कुमार सिंह के मामले में यह नियम जनहित के लिए टूटा है.
क्या है कूलिंग ऑफ पीरियड?
एक बार डेपुटेशन पूरा करने के बाद अधिकारी को तुरंत दोबारा डेपुटेशन पर नहीं भेजा जा सकता. इसके लिए कूलिंग ऑफ पीरियड का नियम लागू होता है. इसका अर्थ है कि अधिकारी को अपने मूल राज्य कैडर में वापस जाकर एक निश्चित समय तक सेवा देनी होगी. संयुक्त सचिव स्तर तक के अधिकारियों के लिए यह अवधि सामान्यतः तीन वर्ष की होती है. कूलिंग ऑफ पीरियड पूरा किए बिना अधिकारी केंद्र में दोबारा प्रतिनियुक्ति के लिए पात्र नहीं होता. यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि राज्यों में भी वरिष्ठ अधिकारियों की कमी न हो.
सेवानिवृत्ति के समय सेवा विस्तार के विशेष प्रावधान
अखिल भारतीय सेवा मृत्युसहसेवानिवृत्ति लाभ नियम 1958 के नियम 16 के तहत आईएएस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित है. सामान्य नियम यह है कि कोई भी अधिकारी 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त हो जाएगा. हालांकि, इस नियम के तहत कुछ उच्च पदों के लिए सेवा विस्तार के विशेष अपवाद मौजूद हैं.
- कैबिनेट सचिव: भारत के कैबिनेट सचिव को जनहित में कुल चार वर्ष तक का सेवा विस्तार दिया जा सकता है, बशर्ते उनका कुल कार्यकाल चार वर्ष से अधिक न हो.
- मुख्य सचिव: राज्य के मुख्य सचिव को राज्य सरकार के अनुरोध और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से अधिकतम छह महीने तक का सेवा विस्तार मिल सकता है.
जांच और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख: गृह सचिव, विदेश सचिव, रक्षा सचिव तथा सीबीआई और ईडी जैसी प्रमुख एजेंसियों के निदेशकों के लिए जनहित में दो वर्ष के अनिवार्य कार्यकाल के बाद एकएक वर्ष करके कुल पांच वर्ष तक का कार्यकाल विस्तार संभव है.
राज्यों में तैनात अधिकारियों का सेवा विस्तार
राज्य सरकारों के पास आईएएस अधिकारियों को सीधे सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार देने का सीमित अधिकार होता है. राज्य के मुख्य सचिव के पद को छोड़कर अन्य प्रशासनिक पदों पर सेवा विस्तार के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है. राज्य सरकारें केंद्र की मंजूरी के बिना किसी आईएएस अधिकारी को कैडर पद पर अनिश्चित काल के लिए विस्तार नहीं दे सकतीं. यदि राज्य सरकार को किसी सेवानिवृत्त अधिकारी की विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, तो वे उन्हें सलाहकार या संविदा पद पर नियुक्त कर सकती हैं, लेकिन वे नियमित प्रशासनिक कैडर पद पर नहीं रह सकते.
सेवा विस्तार और डेपुटेशन से जुड़े प्रमुख विवाद
प्रशासनिक स्तर पर सेवा विस्तार और डेपुटेशन को लेकर समयसमय पर विवाद भी सामने आते रहते हैं. किसी एक ही अफसर को बारबार सेवा विस्तार देने से नीचे के योग्य अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर प्रभावित होते हैं. इसे लेकर केंद्र और राज्यों के बीच टकराव भी देखा जाता है, जब राज्य सरकारें अपने वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र में डेपुटेशन के लिए कार्यमुक्त करने से मना कर देती हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि सेवा विस्तार असाधारण स्थितियों और स्पष्ट जनहित में ही दिया जाना चाहिए, इसे सामान्य प्रशासनिक प्रथा नहीं बनाया जाना चाहिए.
आईएएस अधिकारियों के डेपुटेशन और सेवा विस्तार के नियम अत्यंत स्पष्ट एवं पारदर्शी बनाए गए हैं. डेपुटेशन सामान्यतः चार से पांच वर्ष के लिए होता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से अधिकतम सात वर्ष तक ही बढ़ाया जा सकता है. वहीं सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार केवल कैबिनेट सचिव, मुख्य सचिव और सुरक्षा से जुड़े शीर्ष पदों तक ही सीमित है. यह संतुलन प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.



