एच1एन1 इन्फ्लूएंजा यानी स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी है. दरअसल, दिल्ली में मानसून और उमस भरे मौसम के बीच एच1एन1 के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में कई घरों में इसके मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है. हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने देश में स्वाइन फ्लू की स्थिति और इससे जुड़ी तैयारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बैठक की. इस दौरान मरीजों की जांच, इलाज और अस्पतालों की तैयारियों पर ध्यान दिया गया.

स्वाइन फ्लू एक तरह का फ्लू है, जो सांस की बीमारी पैदा करता है. इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, थकान और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं. इन सबके बीच एम्स नई दिल्ली में मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर नीरज निश्चल ने टीवी9 भारतवर्ष खास बातचीत की. एक्सपर्ट से जानें बचाव के तरीके…
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
इस बात का दावा किया कि समय रहते यदि कुछ सावधानी बरती जाए तो इस बीमारी के प्रकोप से बचा जा सकता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल इसके स्वरूप को देखकर यह कहा जा सकता है कि इसमें बड़ी संख्या में अस्पताल में दाखिल की जरूरत नहीं है. राजधानी में इस साल एच1एन1 के कुल 1,777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में छह गुना से ज्यादा हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 2,392 इन्फ्लूएंजाए मामलों में से अधिकांश एच1एन1 के हैं. ऐसा भी पाया गया है कि अकेले एक दिन में 114 नए मामले भी दर्ज किए गए हैं. डॉक्टरों के मुताबिक इस बार का स्ट्रेन कोई नया नहीं है. पिछले साल की तरह ही है.
अलर्ट मोड पर हैं अस्पताल
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सरकार के सूत्रों के मुताबिक इस वक्त मरीजों के दाखिले में कोई बड़ी संख्या देखने को नहीं मिल रही है. बावजूद इसके सभी अस्पतालों को सजग रहने की हिदायत दी गयी है.
क्या हैं इसके लक्षण
डॉक्टर नीरज ने बताया कि एच1एन1 की यदि बात करें तो किसी भी मरीज को सबसे पहले अचानक से तेज बुखार आता है. इसके साथ ही सूखी खांसी और गले में खराश और शरीर में तेज दर्द और थकान भी महसूस होता है. कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन स्तर में गिरावट देखने को मिलती है.
क्या करें क्या ना करें
डॉ नीरज ने कहा कि सबसे जरूरी यह है कि कोविड से सीखते हुए हमें प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए. इसके तहत मरीज को मास्क लगाना और कई तरह की सावधानी बरतने की जरूरत है जिससे कि मरीज खुद भी बच सके और दूसरों को संक्रमित होने से बचाएं.


