भारत में चीनी के दाम बीते एक महीने में लगभग 24 फीसदी तक बढ़ गए हैं. जुलाई में जो चीनी 48 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, अब 5860 रुपये मुंबई और कोलकाता में 70 रुपये तक फुटकर दाम हो चले हैं. अचानक आई इस महंगाई के पीछे अलगअलग कारण बताए जाते हैं. कोई त्योहारी मांग से जोड़ रहा है तो कुछ लोग जमाखोरी को कारण बता रहे हैं. इस बीच भारत ने ब्राजील से चीनी मंगाने का फैसला लिया है. दावा किया गया है कि ब्राजील से चीनी की पहली खेप 15 अक्टूबर तक भारत पहुंचेगी.

आइए, इसी बहाने समझते हैं कि ब्राजील चीनी का गढ़ कैसे बना? उत्पादन में वह कैसे आगे हैं? कितने देशों को ब्राजील चीनी भेजता है? भारत चीनी उत्पादन के मामले में दुनिया में कहां है? दुनिया के टॉप पांच चीनी उत्पादक देश कौनकौन हैं?

उत्पादन ही नहीं, निर्यात में भी आगे है ब्राजील

ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. वह केवल ज्यादा चीनी नहीं बनाता, बल्कि उसका सबसे बड़ा निर्यातक भी है यानी दुनिया के कई देशों की चीनी जरूरत ब्राजील से पूरी होती है. ब्राजील में चीनी मुख्य रूप से गन्ने से बनती है. वहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है. खेत बड़े हैं. मिलें आधुनिक हैं. बंदरगाहों तक माल पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत है. यही कारण है कि ब्राजील की चीनी दुनिया के बाजार में बहुत प्रतिस्पर्धी मानी जाती है.

अमेरिकी कृषि विभाग के मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार ब्राजील का चीनी उत्पादन 202627 में करीब 4.25 करोड़ टन रह सकता है. यह मात्रा किसी भी दूसरे देश से अधिक है. इसी अवधि में वैश्विक चीनी उत्पादन लगभग 18.49 करोड़ टन रहने का अनुमान है. यानी दुनिया की कुल चीनी में ब्राजील का हिस्सा बहुत बड़ा है.

कहां से आती है ब्राजील के पास उत्पादन की ताकत?

ब्राजील की सफलता का बड़ा कारण उसका मौसम है. वहां कई इलाकों में गन्ने के लिए गर्म और नम जलवायु मिलती है. पर्याप्त धूप भी मिलती है. इससे गन्ने की अच्छी पैदावार होती है. ब्राजील में गन्ने के बड़े खेत हैं. कई उत्पादक आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करते हैं. कटाई, ढुलाई और प्रसंस्करण में मशीनों की भूमिका बढ़ी है. इससे लागत कम करने में मदद मिलती है. वहां चीनी मिलों का नेटवर्क बेहद मजबूत है.

कई मिलें गन्ने से दो प्रमुख उत्पाद बनाती हैं. पहला है चीनी. दूसरा है इथेनॉल. इथेनॉल एक जैव ईंधन है. इसका इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जाता है. जब चीनी के दाम अच्छे होते हैं, मिलें चीनी उत्पादन बढ़ा सकती हैं. जब इथेनॉल का बाजार बेहतर होता है, तो गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल बनाने में लगाया जा सकता है. यह लचीलापन ब्राजील के उद्योग को मजबूत बनाता है.

चीनी गन्ने से तैयार होती है और उत्तर प्रदेश इसके प्रोडक्शन में आगे है.

चीनी और इथेनॉल का संतुलन भी बनाता है यह देश

ब्राजील का चीनी उद्योग सिर्फ मिठास का कारोबार नहीं है. यह ईंधन से भी जुड़ा हुआ है. गन्ने से बनने वाला इथेनॉल वहां की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसी कारण हर साल गन्ने का पूरा रस चीनी में नहीं बदलता. मिलें बाजार की स्थिति देखकर फैसला करती हैं. चीनी की कीमत, इथेनॉल की मांग और घरेलू ईंधन नीति इस फैसले को प्रभावित करती है. अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार 202627 में ब्राजील में गन्ने के उपयोग का झुकाव इथेनॉल की ओर रहने का अनुमान है. इससे चीनी उत्पादन पिछले स्तर से कुछ कम हो सकता है. फिर भी ब्राजील दुनिया में नंबर एक बना रहेगा.

ब्राजील लगभग 150 से अधिक देशों तक चीनी पहुंचाता है.

150 से अधिक देशों तक जाती है ब्राजील की चीनी

ब्राजील की चीनी दुनिया भर में जाती है. अलगअलग व्यापारिक डेटाबेस और उद्योग स्रोतों में गंतव्य देशों की संख्या अलग मिलती है. इसलिए एक ही आधिकारिक संख्या बताना सही नहीं होगा. आम तौर पर यह माना जाता है कि ब्राजील लगभग 150 से अधिक देशों तक चीनी पहुंचाता है. इस निर्यात का बड़ा हिस्सा एशिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों में जाता है.

चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, मिस्र और नाइजीरिया जैसे देश महत्वपूर्ण खरीदारों में गिने जाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आयातक देशों की जरूरत हर साल बदलती रहती है. ब्राजील समुद्री मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्ची चीनी भेजता है. कच्ची चीनी को कई देश अपने यहां रिफाइन करके सफेद चीनी में बदलते हैं. कुछ बाजारों को सीधे रिफाइंड चीनी भी भेजी जाती है.

घरेलू खपत कम होने की वजह से निर्यात में आगे है ब्राजील

उत्पादन में आगे होने का सीधा लाभ निर्यात में मिलता है. ब्राजील का घरेलू उपभोग उसके कुल उत्पादन की तुलना में कम है. इसलिए उसके पास विदेश भेजने के लिए बड़ा अधिशेष बचता है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ब्राजील ने 202425 में करीब 3.49 करोड़ टन चीनी का निर्यात किया. 202627 के लिए निर्यात का अनुमान लगभग 3.36 करोड़ टन है. यह दुनिया के किसी भी देश से काफी अधिक है. अच्छे बंदरगाह, विशाल उत्पादन और बड़े खरीदारों से पुराने व्यापारिक संबंध ब्राजील की ताकत हैं. जब किसी दूसरे बड़े उत्पादक देश में फसल कमजोर होती है, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार ब्राजील पर और अधिक निर्भर हो जाता है.

भारत चीनी उत्पादन में किस पायदान पर है?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. भारत की स्थिति मजबूत है, क्योंकि यहां गन्ने की खेती बड़े क्षेत्र में होती है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं. भारत का चीनी उत्पादन 202627 में करीब 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान है. यह पिछले वर्ष के अनुमान से बेहतर है. अच्छे मानसून और भूजल स्थिति में सुधार से उत्पादन बढ़ने की संभावना बताई गई है.

हालांकि, भारत बड़ा उत्पादक है, लेकिन यहां चीनी की घरेलू खपत भी बहुत अधिक है. इसलिए भारत हमेशा बहुत बड़ी मात्रा में निर्यात नहीं करता. सरकार घरेलू कीमतों और उपलब्धता को ध्यान में रखकर निर्यात नीति तय करती है. यही भारत और ब्राजील के बीच बड़ा अंतर है. ब्राजील का मॉडल निर्यातकेंद्रित है. भारत का मॉडल पहले घरेलू जरूरत को प्राथमिकता देता है.

ब्राजील कब तक आगे बना रहेगा?

ब्राजील का दबदबा मजबूत है. लेकिन यह स्थायी और बिना चुनौती वाला नहीं है. सूखा, अधिक बारिश, आग, फसल रोग, वैश्विक कीमतें और इथेनॉल की मांग उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं. भारत भी तेजी से महत्वपूर्ण बना हुआ है. अगर भारत में गन्ने की पैदावार अच्छी रहती है, तो वैश्विक चीनी बाजार में उसका असर बढ़ता है. थाईलैंड और चीन भी बाजार की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं. यद्यपि, ब्राजील के पास बड़े खेत हैं. आधुनिक मिलें हैं. इथेनॉल का विकल्प है. निर्यात के लिए मजबूत ढांचा है. और दुनिया भर में खरीदार हैं. इन्हीं कारणों से ब्राजील आज शक्कर का वैश्विक गढ़ बना हुआ है. उम्मीद है कि चुनौतियों के बीच आगे भी अभी इसे टक्कर देने वाला कोई दूसरा नहीं है.