केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को नई दिल्ली के द्वारका स्थित CBSE इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स में CBSE एक्सपीरिएंस सेंटर का उद्घाटन किया. इस सेंटर का मकसद छात्रों को किताबी पढ़ाई से आगे ले जाकर अनुभव के जरिए सीखने का मौका देना है. यहां छात्र भारत में शिक्षा के इतिहास, नई तकनीक और भविष्य में करियर के अलगअलग विकल्पों के बारे में जान सकेंगे.

CBSE एक्सपीरिएंस सेंटर में कुल 12 जोन और 21 एग्जिबिट्स बनाए गए हैं. यहां RFID आधारित स्मार्ट कार्ड के जरिए छात्र अलगअलग गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे. इसके साथ ही उन्हें अपनी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी और गेम आधारित लीडरबोर्ड भी देखने को मिलेंगे.
गुरुकुल से डिजिटल क्लासरूम तक का सफर
सेंटर में ‘शिक्षा की कहानी’ नाम से एक फिल्म दिखाई जाएगी, जिसमें भारत की शिक्षा व्यवस्था के विकास को दर्शाया गया है. इसमें गुरुकुल परंपरा, नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों से लेकर आधुनिक स्कूलों और डिजिटल क्लासरूम तक के सफर को दिखाया गया है. इसके अलावा ऐतिहासिक तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए CBSE के विकास की कहानी भी बताई गई है.यहां पृथ्वी के लाखों साल पुराने इतिहास को समझने के लिए इंटरैक्टिव जियोलॉजिकल टाइमलाइन भी बनाई गई है.
करियर के विकल्पों को समझ सकेंगे छात्र
सेंटर में ‘करियर एक्सप्लोरर’, ‘फ्यूचर ऑफ प्रोफेशंस’ और ‘मैजिक मिरर: फ्यूचर यू’ जैसे इंटरैक्टिव एग्जिबिट्स हैं. इनके जरिए छात्र अलगअलग करियर विकल्पों और भविष्य में बदलते रोजगार के स्वरूप को समझ सकेंगे. यहां डॉ. भीमराव आंबेडकर और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों के होलोग्राफिक अनुभव भी मिलेंगे.
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किताब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ पर आधारित एक विशेष कियोस्क बनाया गया है. इसमें छात्रों को परीक्षा के तनाव से निपटने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश दिया जाएगा.
जंगल से हिमालय तक का अनुभव
सेंटर के आखिरी हिस्से ‘एडुवर्स’ में मोशन आधारित तकनीक और कई तरह के संवेदी अनुभवों के जरिए छात्रों को जंगल, महासागर, हिमालय, चांद और दूसरे ग्रहों की यात्रा जैसा अनुभव मिलेगा। इसके जरिए प्रकृति और पर्यावरण के आपसी जुड़ाव को समझाया जाएगा।
रटने के बजाय समझने पर जोर: प्रह्लाद जोशी
उद्घाटन के दौरान शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में रटकर सीखने और केवल परीक्षा के अंकों पर ध्यान देने के बजाय छात्रों की रुचि, क्षमता और सीखने के तरीके को महत्व दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों को वैज्ञानिक अवधारणाओं को सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि प्रयोग करके और वास्तविक अनुभवों के जरिए समझना चाहिए.
मंत्री ने कहा कि CBSE एक्सपीरियंस सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुभव आधारित और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल है. उन्होंने बताया कि देशभर में 10 हजार अटल टिंकरिंग लैब पहले से चल रही हैं और सरकार ने 50 हजार अतिरिक्त लैब स्थापित करने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा कि छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करना जरूरी है, ताकि वे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दे सकें.



