सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश भर में एसिड हमलों की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति एक तरह से नीतिगत विफलता को दर्शाती है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि केवल सहानुभूतिपूर्ण और भावुक भाषा में एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाला परिपत्र जारी करने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा.

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच ने कहा केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी राज्य एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले उसके दिशानिर्देशों को लागू करें. कोर्ट ने केंद्र सरकार को एसिड की बिक्री के नियमन पर एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि बाजारों में एसिड का आसानी से उपलब्ध होना, कोर्ट के पिछले आदेशों के उद्देश्य को ही विफल कर रहा है.

‘बिक्री को रोकने के लिए बनी गाइडलाइंस विफल’

सुप्रीम कोर्ट ने ने एसिड हमलों की लगातार हो रही घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर नाराजगी भी जताई. कोर्ट ने कहा कि एसिड की अवैध बिक्री को रोकने के लिए बनाई गई उसकी गाइडलाइंस विफल रही हैं. एसिड हमलों के पीड़ितों के पुनर्वास और एसिड की बिक्री को विनियमित करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया.

अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

एसिड हमलों की शिकार महिलाओं द्वारा सख्त नियमन और बेहतर पुनर्वास की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा ‘बाजारों में एसिड का आसानी से मिलना हमारे आदेशों के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर रहा है. इस दिशा में क्या किया जा रहा है? अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें’

कोर्ट ने गौर किया कि 2013 और 2015 के अपने निर्देशों के बावजूद जिनमें एसिड की बिक्री को विनियमित करने, फोटो पहचान पत्र और पते का प्रमाण मांगने, एसिड खरीदने का कारण बताने और नाबालिगों को इसकी बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई थी एसिड अभी भी खुलेआम उपलब्ध है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कई बार परामर्श जारी किए हैं और ‘मॉडल नियम’ भी भेजे हैं, लेकिन इन्हें लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की है. उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार सख्त सजा के प्रावधानों के साथ नई गाइडलाइंस लाने पर विचार करेगी.

केंद्र सरकार से मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. इसमें राज्यवार आंकड़े होने चाहिए, जैसे कि लाइसेंस प्राप्त विक्रेता कितने हैं, कितनी बार निरीक्षण किया गया, अवैध बिक्री के लिए कितनी FIR दर्ज की गईं, और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.

इसके अलावा, कोर्ट ने पीड़ितों को दिए गए मुआवजे, CrPC की धारा 357C के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा, और उनके शिक्षा एवं रोजगार के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी.

याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मुफ्त इलाज के आदेशों के बावजूद, पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी हो रही है और कई मामलों में उन्हें इलाज देने से भी मना कर दिया जाता है. कोर्ट ने कहा कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार में पीड़ितों का उचित पुनर्वास भी शामिल है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी.