कांग्रेस सेवा दल ने संगठन के अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. के इंस्टाग्राम अकाउंट और भारत में कांग्रेस सेवा दल के आधिकारिक एक्स अकाउंट को सस्पेंड किए जाने की कड़ी निंदा की है. संगठन ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक बातचीत से जुड़ा गंभीर मामला बताया और घोषणा की कि वो इन सस्पेंशन को चुनौती देने और उचित कानूनी उपाय खोजने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन सोशल मीडिया अकाउंट के सस्पेंशन से पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के साथ बातचीत करने की राजनीतिक संगठनों की आज़ादी पर गंभीर सवाल उठते हैं.

संगठन ने कहा, ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज के समय में लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए एक जरूरी जरिया बन गए हैं, जो राजनीतिक संगठनों को अपने विचार साझा करने, जनहित के मुद्दों को उठाने और सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह ठहराने में सक्षम बनाते हैं’.
कांग्रेस सेवा दल का मानना है कि राजनीतिक अभिव्यक्ति को प्रभावित करने वाली पाबंदियां पारदर्शी, कानूनी आधार पर आधारित और प्रभावी समीक्षा के दायरे में होनी चाहिए. संगठन ने सस्पेंशन के कारणों के बारे में स्पष्टीकरण और लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत अकाउंट को तुरंत बहाल करने की मांग की है.
संगठन के अध्यक्ष ने क्या कहा?
कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. ने कहा, ‘मेरे इंस्टाग्राम अकाउंट और कांग्रेस सेवा दल के आधिकारिक एक्स अकाउंट का सस्पेंशन बेहद चिंताजनक है. लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी सत्ता में बैठे किसी व्यक्ति द्वारा दी गई कोई सुविधा नहीं है, यह हमारे संविधान द्वारा गारंटीकृत एक मौलिक अधिकार है. जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक नेताओं और लोकतांत्रिक संगठनों की आवाज़ को दबाया जाता है, तो इससे असहमति की गुंजाइश और ऐसे फैसलों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं. भारत के लोगों को अलगअलग नजरिए सुनने, सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करने और खुली लोकतांत्रिक बहस में हिस्सा लेने का अधिकार है’.
उन्होंने आगे कहा, ‘कांग्रेस सेवा दल ऐसी पाबंदियों के आगे चुप नहीं बैठेगा. हम लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से इस कार्रवाई को चुनौती देंगे, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना भी शामिल है. हमारी लड़ाई सिर्फ दो सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में नहीं है, यह राजनीतिक संगठनों के नागरिकों से बातचीत करने और संवैधानिक आज़ादी की रक्षा करने के अधिकार को बचाने की लड़ाई है. आप हमारे अकाउंट्स सस्पेंड कर सकते हैं, लेकिन संविधान, लोकतंत्र और भारत के लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को सस्पेंड नहीं कर सकते. कांग्रेस सेवा दल निडर होकर अपनी आवाज उठाता रहेगा’.
‘मामले की उचित कानूनी तरीकों से जांच की जाए’
संगठन के लीगल सेल के चेयरमैन संजीव भोआ ने कहा, ‘इन सोशल मीडिया अकाउंट्स के सस्पेंशन से अहम कानूनी और संवैधानिक सवाल उठते हैं. बोलने और अपनी बात रखने की आजादी भारत के संविधान के आर्टिकल 19 के तहत सुरक्षित है, जिसपर आर्टिकल 19 के तहत बताई गई उचित पाबंदियां लागू होती हैं. राजनीतिक बातचीत पर किसी भी पाबंदी की जांच लागू कानून, आधार और अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर की जानी चाहिए. ऐसी कार्रवाई के लिए साफ और पारदर्शी वजह न होने की वजह से यह जरूरी हो जाता है कि इस मामले की उचित कानूनी तरीकों से जांच की जाए’.
उन्होंने आगे कहा, ‘लोकतंत्र को ऐसी व्यवस्था में नहीं बदला जा सकता, जहां बिना पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही के सार्वजनिक बातचीत से आवाज़ों को बाहर रखा जा सके. हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर कानूनी उपाय का इस्तेमाल करेंगे कि इस मामले पर उचित न्यायिक विचार हो’.



