Prashant Kishor: पटना में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और में CJP के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 8 से 10 साल में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लोगों का भरोसा कम हुआ है। प्रशांत के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए बड़े सुधारों की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोगों की चिंताओं को दूर नहीं किया गया, तो ऐसे आंदोलन आगे भी बढ़ सकते हैं। दिल्ली में करीब 40 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती को भी उन्होंने सरकार की घबराहट से जोड़कर देखा।

वोटर लिस्ट में नाम जोड़नेकाटने की प्रक्रिया पर सवाल
प्रशांत किशोर ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने फॉर्म 6 और 7 में हुए बदलावों के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल किए। उनका कहना है कि इन प्रक्रियाओं को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा हुआ है। उन्होंने चुनाव आयोग से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने की प्रक्रिया पारदर्शी हो। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़े उनके आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित आंकड़ों और आधिकारिक जानकारी को देखना जरूरी है।
40 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर उठाए सवाल
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रशांत किशोर ने टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि राजधानी में करीब 40 हजार पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बलों के जवान और अन्य सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।
प्रशात किशोर ने कहा कि इतनी पुलिस की तैनाती बहुत कुछ कह रही है। उन्होंने इसे आंदोलन को लेकर सरकार की चिंता से जोड़ा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रशांत किशोर ने करीब एक महीने पहले जंतरमंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की नाराजगी अब भी बनी हुई है। उनके मुताबिक, शिक्षा, बेरोजगारी और परीक्षा में पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
बिहार में 7वीं फेल मुख्यमंत्री
प्रशांत किशोर ने बिहार में शिक्षकों के प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने 7वीं फेल मुख्यमंत्री क्या जानेगा शिक्षकों की पेरशानी। शिक्षकों की समस्याओं को समझने की उनकी क्षमता पर सवाल किया। इस दौरान उन्होंने बिहार के पढ़ेलिखे समाज की भूमिका पर भी टिप्पणी की। ये बयान प्रशांत किशोर की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।
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चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लोगों के मन में भरोसा बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि लोगों को पता रहे कि चुनावी प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोगों की शिकायतों और युवाओं की नाराजगी को नजरअंदाज करने से आंदोलन खत्म नहीं होंगे। फिलहाल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर उनके बयान राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं।
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