
नई दिल्ली: दिल्ली में मंगलवार (6 OCT) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एक तरफ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और दूसरी तरफ ज्ञानेश कुमार से मिलने की मांग को लेकर भी अड़ गए।
हालांकि पूरे दिन चले सियासी घटनाक्रम के बाद रात के समय दिल्ली पुलिस ने एक्शन लिया और दिल्ली के आकाशवाणी भवन से कांग्रेस के नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत करीब 50 सांसद और लगभग 250 लोगों को हिरासत में लिया।
नेताओं को हिरासत में लेने के बाद छोड़ा गया
जब राहुल और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया, उस वक्त खूब हंगामा हुआ। हालांकि कुछ ही देर बाद ये साफ हो गया कि कागजी कार्रवाई करने के बाद सभी नेताओं को छोड़ दिया जाएगा। आखिर में यही हुआ और राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत सभी कांग्रेस नेताओं को हिरासत से छोड़ दिया गया।
नेताओं को हिरासत में लेने के बाद संसद मार्ग से बेरीकेडिंग हटा ली गईं और नई दिल्ली में भी ट्रैफिक को पूरी तरह खोल दिया गया।
नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस को मिली शिकायत
आकाशवाणी के ऑफिस में जबरन घुसने पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनके साथ मौजूद लोगों और सासंदो के खिलाफ दिल्ली पुलिस को शिकायत भी मिली है।
दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, “दिल्ली पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई कि INDI Alliance Bloc द्वारा 6 अक्तूबर 2026 को सुबह करीब 10:30 बजे संसद भवन से निर्वाचन आयोग (ECI) के कार्यालय की ओर मार्च निकाला जाएगा। प्रस्तावित मार्च के आयोजन के संबंध में अनुमति हेतु कोई आवेदन उपायुक्त पुलिस, नई दिल्ली जिला के कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया था। अतः उक्त प्रस्तावित मार्च के लिए कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई थी।”
दिल्ली पुलिस ने बताया, “प्रस्तावित जमावड़े तथा नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के अंतर्गत लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन की आशंका को दृष्टिगत रखते हुए कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ की आवाजाही को नियंत्रित करने तथा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मार्च करीब 10:30 बजे शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए पहले बैरिकेड को तोड़ा और आगे बढ़ते हुए नीति आयोग के निकट लगाए गए दूसरे बैरिकेड तक पहुंच गए। पुलिस द्वारा बार-बार घोषणा कर प्रदर्शनकारियों को धारा 163 BNSS के तहत लागू प्रतिबंधों की जानकारी दी गई और उनसे शांतिपूर्वक वापस जाने की अपील की गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के निर्देशों का पालन नहीं किया और वहां बने रहे। वैध निर्देशों की लगातार अवहेलना तथा स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा कानून के अनुसार प्रदर्शनकारियों को निरुद्ध किया गया। लगभग 260 व्यक्तियों, जिनमें 10 सांसद भी शामिल हैं, को निरुद्ध कर दिल्ली के विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया, जहां उनके संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद अधिकांश प्रदर्शनकारी वहां से चले गए। हालांकि, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, मनीष छत्रथ और करीब 50–60 समर्थक बिना अनुमति के आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर वहां बैठ गए।”
दिल्ली पुलिस ने बताया, “राहुल गांधी ने आकाशवाणी परिसर से बाहर जाने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को निर्वाचन आयोग (ECI) से मिलने के लिए समय नहीं दिया जाता, तब तक वे वहां से नहीं जाएंगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कार्रवाई करनी पड़ी। इस कार्रवाई के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित अन्य प्रदर्शनकारियों को भी परिसर से हटाया गया और आवश्यकतानुसार निरुद्ध किया गया। कार्रवाई कानून के अनुसार की गई तथा इस दौरान कानून-व्यवस्था एवं सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। दिल्ली पुलिस द्वारा क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की व्यवस्था की गई है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सभी संबंधित व्यक्तियों से शांति बनाए रखने और पुलिस द्वारा दिए गए वैध निर्देशों का पालन करने की अपील की जाती है।”
इससे पहले एक खबर ये भी सामने आई थी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CAPF जवान पर चाकू से हमला हुआ था और NSUI के कार्यकर्ता पर आरोप लगा था।



