महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव आयोजित किया गया. हर साल आरएसएस विजयादशमी के अवसर पर ये उत्सव आयोजित किया जाता है. इस अवसर पर शस्त्र पूजन के बाद आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उत्सव को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि देश की स्वाधीनता के लिए जितनी तपस्या व समर्पण हुआ, उससे कहीं अधिक की जरूरत अब पड़ेगी, परिस्थिति को देखते हैं तो यह ध्यान में आता है.

उन्होंने कहा कि कई माध्यमों से प्राप्त जानकारी बिना उचितअनुचित का विवेक किए नई पीढ़ी ग्रहण करती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद कई देशों ने कुछ अनुशासन और निर्बन्ध लागू किए हैं. हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की जरूरत OTT platforms को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है. शासन प्रशासन को इसका विचार करना चाहिए.
नशीली दवाएं घातक, बन गई राष्ट्रीय समस्या भागवत
ओटीटी कंटेंट को चयन को लेकर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अगर हमारे संस्कारों का प्रश्न है तो हमें नई पीढ़ी को सिखाना पड़ेगा कि कैसे चुनना है. उस विवेक के अनुपस्थिति के कारण व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक जीवन में कई प्रकार के दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं. ऐसे विवेक के अभाव में ही नशीली दवाओं की एक समस्या खड़ी हो गई है. नशीली दवाएं घातक होती हैं, लेकिन फिर भी उसकी आदत लगती है और वो एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन गई है. समय रहते हुए सरकार सहित हम को इसका विचार करना पड़ेगा. खासतौर पर नए अभिभावक पीढ़ी पर इसका गौर करना होगा. नई पीढ़ी को इन चीजों से दूर रहने की अपनी आदत बनानी पड़ेगी.
उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीकी की प्रगति मनुष्यों को भौतिक दृष्टि से सुखी जीवन जीने में, जीवन में ज्ञान और तर्क के आधार पर अपने व्यवहार को निर्दोष करने में मदद करती है, पर यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि तकनीकी केवल साधन है. केवल उपभोगवादी दृष्टिकोण से विकास होता है तो सुखसुविधा के साथ उससे बड़ी हानी मोल लेनी पड़ती है.
मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित मछार को बताया प्रेरणा
मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिन्दू भाव को जगाकर समाज को एक सुसंगठित व बल संपन्न समाज बनाने के लिए कार्य कर रहा है. व्यक्ति जीवन से विश्व जीवन तक की धारणा, प्रतिष्ठा, सुरक्षा भी बिना सामर्थ्य के संभव नहीं. संगठित व बल संपन्न हिन्दू समाज की बात करना या उसके लिए कार्य करना सर्व पंथ समादर की भावना अथवा राष्ट्र की भावनिक एकात्मकता के विरुद्ध नहीं है; हिंदू समाज का विचार व स्वभाव समावेशक होने के नाते संघ कार्य हम सबकी भावनिक एकात्मता, सद्भावना व सदाचार का पोषक ही होगा. पीढ़ी दर पीढ़ी मिलता रहा यह स्वभाव व संस्कार ही कैप्टन स्मित मछार को अपनी प्राणों की बाजी लगाकर मनुष्यों के संरक्षण के लिए स्वयं को झोंक देने की प्रेरणा देता है.



