सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा मजदूरों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में नोएडा डीएम मेधा रूपम को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने मेधा रूपम की सैलरी से 5 लाख रुपए का मुआवजा देने के हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में जिलाधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने NSA रद्द करने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है. जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने ये आदेश पारित किया.

दरअसल, नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में डीयू की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ NSA लगाने को लेकर डीएम मेधा रूपम की हाई कोर्ट में जमकर किरकिरी हुई थी. नोएडा प्रशासन आकृति चौधरी के खिलाफ NSA को लेकर पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाया था. इसके बाद हाई कोर्ट ने नोएडा डीएम मेधा रूपम के खिलाफ आदेश जारी करते हुए उनकी सैलरी से 5 लाख रुपए का मुआवजे देने का आदेश दिया था.
साथ ही साथ हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी के खिलाफ NSA को भी रद्द कर दिया था. इसके बाद नोएडा डीएम मेधा रूपम और यूपी सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले पर पैराग्राफ 27 से 33 के संचालन पर अंतरिम रोक जारी रखने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट अब 7 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा.
आकृति चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने 13 अप्रैल को नोएडा में हुए एक विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा भड़काई थी, जिसमें मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बता दें कि 2 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया था और इसे मंजूरी देने के लिए जिला मजिस्ट्रेट की आलोचना की थी.
मेधा रूपम के वकील ने कोर्ट में क्या कहा?
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, IAS अधिकारी मेधा रूपम के वकील ने तर्क दिया कि हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट के पास किसी आदेश को रद्द करने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह किसी खास सरकारी अधिकारी को अलग से चुनकर उसकी आलोचना नहीं कर सकता. वहीं, आकृति चौधरी के वकील ने उनकी हिरासत के आधार को चुनौती देते हुए कहा कि हिंसा होने से पहले ही वह पुलिस हिरासत में थीं.
नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. आकृति की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट ने नोटिस स्वीकार कर लिया. दूसरे प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है. सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर दोनों पक्षों के सीनियर वकीलों की दलीलें सुनीं.
अब 7 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2 सितंबर, 2026 के फैसले, खासकर पैराग्राफ 27 से 33, जिनमें कड़ी टिप्पणियां की गई हैं. हाई कोर्ट के फैसले पर तब तक रोक रहेगी जब तक कि मामले के कोई फैसला नहीं हो जाता. हाई कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27 से 33 के अमल पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी और अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है.



