RBI Repo Rate Hike: बुधवार का दिन शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के लिए किसी रोलर कोस्टर की सवारी जैसा साबित हुआ. सुबह जैसे ही रिजर्व बैंक के फैसले की खबर आई, बाजार में एक झटके में तेज गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स 547 अंक तक नीचे लुढ़क गया और निफ्टी में भी बड़ी फिसलन आ गई.

कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय गिरकर 72,520.73 के स्तर तक चला गया था और निफ्टी भी 22,578.25 के निचले स्तर तक पहुंच गया था. लेकिन इसके बाद निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी लौटी. सेंसेक्स संभलकर 72,969.57 पर पहुंच गया और निफ्टी ने भी 22,701.6 का स्तर छू लिया. सुबह 11:30 बजे के करीब निफ्टी 22,682 पर और सेंसेक्स 72,904 पर कारोबार करता दिखा.

बाजार के इस तरह संभलने के पीछे रिजर्व बैंक का एक बड़ा अनुमान रहा. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए देश की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 7.1% कर दिया. रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया में भले ही कितनी उथलपुथल मची हो, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था पूरी मजबूती से टिकी हुई है. विकास की इस मजबूत उम्मीद ने निवेशकों के टूटे हुए भरोसे को तुरंत सहारा दिया.

चार साल बाद महंगे कर्ज का फैसला

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चली. इसमें सभी सदस्यों ने मिलकर रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाने का फैसला लिया. अब ये दर 5.25% से बढ़कर 5.5% हो गई है. महंगाई के बढ़ते दबाव की वजह से पिछले चार सालों में पहली बार ब्याज दरों में ये बढ़ोतरी की गई है.

केंद्रीय बैंक ने अपने रुख को भी कड़ा करते हुए इसे ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदल दिया है. स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी को बढ़ाकर 5.25% किया गया, जबकि बैंक रेट को 5.75% पर ही रखा गया. गवर्नर ने ये भी साफ संकेत दिए कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों में कटौती की कोई उम्मीद नहीं है. इसी वजह से बाजार में शुरुआती दौर में भारी दबाव बन गया था.

दुनिया भर से आया दबाव

सिर्फ देश के अंदर का फैसला ही नहीं, बल्कि विदेशी खबरों ने भी बाजार को डराया था. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमला किया, जिससे कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. इसके अलावा अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.27% से बढ़कर 5.31% पर आ गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने भी वैश्विक स्तर पर थोड़ा तनाव पैदा किया.

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार का कहना है कि 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अंदाजा बाजार को पहले से ही था. असली बात ये है कि अमेरिका में मजबूत होते डॉलर को देखते हुए विदेशी निवेशकों को पैसे निकालने से रोकने के लिए ये दरें बढ़ाना जरूरी हो गया था. अगर सेक्टर्स की बात करें तो कोटक बैंक, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस में तेजी रही, जबकि टाइटन, एशियन पेंट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई.

नए निवेश पर एक्सपर्ट्स की राय

अब सवाल आता है कि निवेशक इस समय क्या कदम उठाएं? क्या उन्हें इस तेजी को देखकर नया पैसा लगा देना चाहिए या अभी थोड़ा संभलना चाहिए? शेयर.मार्केट बाय फोनपे के एक्सपर्ट निश्चल जैन की राय है कि निवेशकों को न तो घबराहट में अपने शेयर बेचने चाहिए और न ही किसी अचानक आई तेजी के पीछे भागकर पैसे लगाने चाहिए.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय जल्दबाजी में नया पैसा झोंकने से बचना चाहिए. निवेशकों को अपनी जेब में कुछ नकदी बचाकर रखनी चाहिए. जब बाजार किसी बड़े सपोर्ट लेवल के पास गिरे, तब बैंकिंग, एफएमसीजी, ऑटो और आईटी जैसे मजबूत सेक्टर्स की बड़ी और सुरक्षित कंपनियों में धीरेधीरे खरीदारी करनी चाहिए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अभी एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय थोड़ाथोड़ा करके गिरावट में पैसा लगाना ही सबसे समझदारी भरा फैसला साबित होगा.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.