रिजर्व बैंक ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए अपनी GDP ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया, साथ ही चेतावनी दी कि लंबे समय से चल रहे ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन इकोनॉमिक आउटलुक के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा करते हुए, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखी है, जैसा कि 202627 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP ग्रोथ से साफ है. ग्रोथ को मजबूत प्राइवेट कंजंप्शन और निवेश से बढ़ावा मिला, जबकि नेट एक्सपोर्ट का योगदान भी पॉजिटिव रहा. उन्होंने आगे कहा कि लंबे समय से चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन, अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी की ऊंची कीमतें, ग्लोबल ट्रेड में अतिरिक्त रुकावटें और ग्लोबल फाइनेंशियल स्थितियों में सख्ती जैसी ग्लोबल चुनौतियां ग्रोथ आउटलुक पर असर डाल सकती हैं.

मल्होत्रा ने कहा कि इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए, 202627 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत, दूसरी तिमाही के लिए 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत लगाया गया है. उन्होंने कहा कि ग्रोथ अनुमान में 40 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी, बड़ी चुनौतियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को और उजागर करती है. सेंट्रल बैंक ने यह भी कहा कि Q1:202728 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत है और जोखिम संतुलित हैं.
दुनिया की एजेंसीज ने भी जताया भरोसा
इस बीच, वर्ल्ड बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो अप्रैल के अनुमान से 0.5 प्रतिशत पॉइंट अधिक है. इसे मजबूत घरेलू मांग और अच्छे एक्सपोर्ट से समर्थन मिला है, जबकि ग्लोबल चुनौतियां भी मौजूद हैं. पिछले महीने, एशियन डेवलपमेंट बैंक और OECD तथा S&P और Fitch जैसी अन्य ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर लगभग 7 प्रतिशत कर दिया था. इसे जून तिमाही में मजबूत आर्थिक गतिविधियों और वेस्ट एशिया संघर्ष के बावजूद घरेलू मांग में मजबूती से बढ़ावा मिला. पेरिस स्थित ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 80 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया.
7.8% GDP ग्रोथ ने बदला RBI का नजरिया
जून तिमाही में 7.8 फीसदी की ग्रोथ ने पॉलिसी बनाने वालों का भरोसा बढ़ाया कि घरेलू मांग उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. अगस्त की पॉलिसी मीटिंग में, सेंट्रल बैंक ने पहले ही कहा था कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, और इसके लिए अच्छे कंजम्पशन, सर्विस सेक्टर, इन्वेस्टमेंट और सरकारी खर्च का हवाला दिया था. लेकिन उसने यह भी चेतावनी दी थी कि ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितता, वेस्ट एशिया में संघर्ष और मौसम की मार ग्रोथ पर असर डाल सकती है.
पहली तिमाही के मजबूत आंकड़ों ने बातचीत का रुख बदल दिया है. हालांकि जुलाई और अगस्त में कुछ हाईफ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर थोड़े कमजोर हुए हैं, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. इस मजबूती ने अर्थशास्त्रियों का भरोसा भी बढ़ाया है कि इकोनॉमी कुछ हद तक मॉनेटरी टाइटनिंग को झेल सकती है.
यस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट इंद्रनील पैन ने 1 अक्टूबर को एक रिपोर्ट में कहा था कि ग्रोथ ने वेस्ट एशिया युद्ध के झटकों का सामना किया है और अब ज्यादा भरोसा है कि इकोनॉमी पॉलिसी दरों में मामूली बढ़ोतरी को झेल पाएगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए RBI अगस्त की तुलना में ज्यादा मजबूत ग्रोथ के साथ अक्टूबर की पॉलिसी मीटिंग में जा रहा है — भले ही महंगाई का आउटलुक ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है.
44 महीनों के बाद दरों में बढ़ोतरी
अगस्त के बाद से माहौल कितनी तेजी से बदला है. यह बदलाव फरवरी 2023 के बाद दरों में पहली बढ़ोतरी का संकेत है, जब रेपो रेट को 6.50 फीसदी कर दिया गया था, और यह लंबे समय के ठहराव के बाद RBI के टाइटनिंग की ओर लौटने का संकेत देगा. महंगाई का आउटलुक बिगड़ने के साथ ही दरों में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हुई है.
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, मानसून की अनियमितता ने खानेपीने की चीजों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है, और US फेडरल रिजर्व की हालिया बढ़ोतरी ने दोनों इकोनॉमीज के बीच ब्याज दरों के अंतर को कम कर दिया है. इन सभी दबावों के कारण RBI के लिए उन चीजों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो रहा है जिन्हें पहले अस्थाई सप्लाई शॉक माना जा सकता था.
यह बदलाव एक बार की कार्रवाई के बजाय लंबे समय तक चलने वाले टाइटनिंग साइकल की शुरुआत भी हो सकता है. गोल्डमैन सैक्स ने दरों में बढ़ोतरी के अपने अनुमान को पहले कर दिया है और अब उसे दिसंबर 2026 और फरवरी 2027 में 25बेसिसपॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि पहले उसे इस साइकल के अक्टूबर में शुरू होने की उम्मीद थी.


