: महाराष्ट्र में SIR को लेकर सियासत तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संयुक्त मार्च के बीच MNS प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। साथ ही राज ठाकरे ने चुनाव में EVM  के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात कही।

‘महाराष्ट्र में पूरी SIR प्रक्रिया रद्द हो’

राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में की गई पूरी SIR प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में नए मतदाता जुड़े और अब SIR के तहत बड़ी संख्या में नामों को लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं।
राज ठाकरे ने सवाल किया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात कही जा रही है, वे आखिर कौन हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखें।
हालांकि, मतदाताओं की संख्या और नाम हटाए जाने को लेकर राज ठाकरे द्वारा बताए गए आंकड़े उनके राजनीतिक दावे हैं। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR2026 से संबंधित मतदाता सूची, दावेआपत्तियों और अन्य चुनावी जानकारी की आधिकारिक व्यवस्था उपलब्ध है।

EVM को लेकर भी राज ठाकरे ने उठाए सवाल

में EVM का मुद्दा भी प्रमुख रहा। राज ठाकरे ने कहा कि चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए और मतदान बैलेट पेपर के जरिए कराया जाना चाहिए।

राज ठाकरे ने कहा कि वह साल 201718 से ही कथित वोट चोरी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अलगअलग राजनीतिक नेताओं से मुलाकात भी की थी। उन्होंने एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए।

लोकसभा और विधानसभा के वोटर आंकड़ों पर सवाल

राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में हुए बदलाव को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि दोनों चुनावों के बीच ज्यादा लंबा अंतर नहीं था, इसके बावजूद मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव कैसे हुआ।

उन्होंने विधानसभा चुनाव में पड़े वोटों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव की तुलना में करीब एक करोड़ ज्यादा वोट कैसे पड़े। राज ठाकरे ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मतदान 

प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई।

हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर राज ठाकरे की ओर से लगाए गए सवालों को राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मतदाता सूची और चुनावी आंकड़ों की आधिकारिक जानकारी तथा चुनाव आयोग का पक्ष इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण है।

‘किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत नाराजगी नहीं’

राज ठाकरे ने कहा कि उनका विरोध किसी एक व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल सत्ता के इस्तेमाल और सरकार चलाने के तरीके को लेकर है।

MNS प्रमुख के मुताबिक, सरकार कौन बनाएगा और किसे सत्ता की जिम्मेदारी मिलेगी, इसका फैसला जनता और मतदाताओं को करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता का फैसला मतदाताओं के जरिए होना चाहिए।

BJP सरकार और न्यायपालिका पर भी टिप्पणी

राज ठाकरे ने अपने संबोधन के दौरान BJP सरकार और देश की राजनीतिक व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने एक उद्योगपति के बढ़ते प्रभाव को लेकर आरोप लगाए। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां कीं

हालांकि, इन बयानों को राज ठाकरे के राजनीतिक आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।

उद्धव ठाकरे के साथ संयुक्त मार्च

राज ठाकरे के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब वह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के तहत मुंबई में संयुक्त मार्च कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग और SIR के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया है।

मार्च में कांग्रेस और NCP से जुड़े नेताओं की भागीदारी भी सामने आई है। इस प्रदर्शन को ठाकरे बंधुओं की लंबे समय बाद एक साथ सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधि के तौर पर भी देखा जा रहा है। आयोजकों ने समर्थकों से पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर मार्च में शामिल होने की अपील की है।

राज ठाकरे की प्रमुख मांगें क्या हैं?

राज ठाकरे के बयान के आधार पर उनकी प्रमुख मांगें इस तरह सामने आती हैं
1. महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया रद्द की जाए।
2. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। EVM का इस्तेमाल बंद कर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं।
3. सभी राजनीतिक दल SIR के मुद्दे पर चुनाव आयोग के सामने एकजुट होकर आवाज उठाएं।