दिल्ली सरकार ने सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार की नई कार्य योजना के तहत अब हर साल 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच दिल्ली के बाहर में पंजीकृत और बीएस6 मानकों से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा.

सर्दियों के इन तीन महीनों में राजधानी में हवा की गुणवत्ता सबसे खराब स्तर पर पहुंच जाती है. सरकार का मकसद वाहनों से होने वाले धुएं और सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करना है. दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा जारी सार्वजनिक अधिसूचना के अनुसार, यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.

1 नवंबर से कमर्शियल वाहनों पर भी शिकंजा

अधिसूचना के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से बीएस6 मानकों को पूरा न करने वाले सभी कमर्शियल मालवाहक वाहनों के साथसाथ बाहरी राज्यों से आने वाली बसों पर भी यह प्रतिबंध सख्ती से लागू हो गया है. इसमें ‘ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट’ के तहत चलने वाली बसें भी शामिल हैं. हालांकि, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस पाबंदी से पूरी तरह छूट दी गई है.

सीमाओं पर सख्त पहरा, 250 कर्मी तैनात

नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने कमर कस ली है. दिल्ली के प्रमुख प्रवेश द्वारों, टोल प्लाजा और हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर लगभग 250 प्रवर्तन कर्मियों को तैनात किया गया है. इसमें प्रमुख चेकिंग पॉइंट्स डीएनडी , रजोकरी , गाजीपुर, सिंघू बॉर्डर, टीकरी और बदरपुर बॉर्डर हैं, जहां कड़ी निगरानी रखी जा रही है.

पड़ोसी राज्यों को लिखा पत्र, GRAP3 लागू

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को पत्र लिखकर आग्रह किया गया है कि वे अपनी डीजल गाड़ियों को या तो बीएस6 मानकों में बदलें या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दें. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस बीच, दिल्लीएनसीआर में हवा की गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना का तीसरा चरण लागू कर दिया है, ताकि प्रदूषण को और अधिक बिगड़ने से रोका जा सके.