भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट यानी युद्धपोत बनाने का करार किया है. इसके लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन2 में इस करार पर हस्ताक्षर किए गए.

इस करार के तहत, GRSE पांच कॉर्वेट बनाएगा, जबकि GSL तीन युद्धपोतों का निर्माण करेगा. खास बात यह है कि इन युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना खुद तैयार करेगी और इनका निर्माण प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए चुनी गई सरकारी शिपयार्ड कंपनियां करेंगी. यह भारत में स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.

एडवांस मिसाइल और सेंसर सिस्टम से होंगे लैस

ये नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट एडवांस मिसाइलों, हथियारों और सेंसर सिस्टम से लैस होंगे. इनकी मदद से भारतीय नौसेना हवा, समुद्र और समुद्र के भीतर मौजूद खतरों से निपटने में सक्षम होगी. आधुनिक तकनीक से लैस ये युद्धपोत नौसेना की निगरानी और कार्रवाई करने की क्षमता को भी मजबूत करेंगे.

इन युद्धपोतों के शामिल होने से समुद्री व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई, तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी. खास बात यह है कि इनका डिजाइन देश में ही तैयार किया जाएगा. इससे स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण की क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा.

रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इस परियोजना का फायदा केवल नौसेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससेदेश के रक्षा उद्योग और स्वदेशी जहाज निर्माण को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा. अगले 10 साल में शिपयार्ड में करीब 72 लाख और सहायक उद्योगों और MSME सेक्टर में 460 लाख मानव कार्य दिवसों के रोजगार पैदा होने की उम्मीद है.

मेड इन इंडिया उपकरणों, स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी और मेक इन इंडिया अभियान को नई स्पीड देगी.

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