FCRA Bill 2026: संसद में लाए गए एफसीआरए संशोधन बिल 2026 को लेकर भारतीय स्टेट बैंक ने कुछ अहम सवाल खड़े किए हैं. बैंक ने संयुक्त संसदीय समिति से पूछा है कि अगर किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड हो जाता है, तो उसके खातों में जमा पैसों का क्या होगा. एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी की अगुवाई में अधिकारियों ने इस बिल की समीक्षा कर रही जेपीसी को अपनी चिंताओं से वाकिफ कराया. इसी बैठक में विधायी सचिव राजीव मणि भी मौजूद थे. उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नए नियमों से जवाबदेही मजबूत होगी.

करोड़ों के फंड का लेखाजोखा
एसबीआई ने अपनी प्रेजेंटेशन में आंकड़ों के जरिए पूरी स्थिति समझाई. जेपीसी को बताया गया कि बैंक की नई दिल्ली मुख्य शाखा में कुल 25,432 एफसीआरए खाते मौजूद हैं. इनमें से 14,440 खाते एक्टिव हैं, जो कुल खातों का 57 फीसदी हिस्सा हैं. वहीं 10,992 खातों पर पाबंदियां लगी हुई हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही 24,915 डेजिग्नेटेड खाते भी चल रहे हैं. बैंक में आने वाले विदेशी चंदे की रकम काफी बड़ी है. पिछले साल बैंक को 88,409 रेमिटेंस मिले, जिनकी कुल रकम 23,912 करोड़ रुपये थी. वहीं इस साल 31 अगस्त तक बैंक के पास 9,263 करोड़ रुपये से ज्यादा के 33,397 रेमिटेंस आ चुके हैं.
छोटे संगठनों के सामने बड़ा संकट
बैंक ने समिति के सामने छोटे ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले एनजीओ को लेकर एक बड़ी चिंता जाहिर की है. एसबीआई का कहना है कि अगर ये संगठन समय पर अपना रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं करा पाते हैं, तो उनके लिए अपने ही फंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा. इसके अलावा बैंक ने तकनीकी दिक्कतों का भी जिक्र किया. कई बार किसी संगठन का रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है, लेकिन बैंक तक इसकी आधिकारिक जानकारी पहुंचने में कुछ समय लगता है. एसबीआई ने मांग की है कि इस बीच होने वाले ट्रांजैक्शन को लेकर बैंक को कानूनी सुरक्षा दी जानी चाहिए.
खातों के संचालन पर मांगे निर्देश
एसबीआई ने सरकार के सामने कई सीधे सवाल रखे हैं. बैंक जानना चाहता है कि जब किसी एनजीओ का कंट्रोल सरकार द्वारा तय किए गए अधिकारी के पास चला जाएगा, तब खातों को पूरी तरह से फ्रीज करना है या उन पर कुछ पाबंदियां लगाकर उन्हें चालू रखना है. ये साफ होना चाहिए कि इन खातों को कौन ऑपरेट करेगा. खाते में आने वाले नए पैसे, पहले से मौजूद बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज कैसे हैंडल होगा, इसे लेकर भी बैंक ने स्थिति साफ करने को कहा है. बिल में विदेशी चंदे से जुड़ी संपत्तियों पर सरकारी कंट्रोल की बात जरूर कही गई है, लेकिन विस्तृत बैंकिंग प्रक्रिया का आना बाकी है. दूसरी तरफ, विधायी सचिव राजीव मणि ने साफ किया है कि इन कड़े प्रावधानों का सीधा मकसद विदेशी चंदे की संपत्तियों को ज्यादा पारदर्शी बनाना है.



