वजन का तेजी से घटना और लगातार भूख न लगना… बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकते हैं. इस कंडीशन में डॉक्टर या एक्सपर्ट तुरंत जांच की सलाह देते हैं. मेडिकली देखा जाए तो ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। खांसी, हल्का बुखार, सीने में जकड़न या सांस फूलने जैसे लक्षणों को ज्यादातर लोग सामान्य वायरल इंफेक्शन, एलर्जी या मौसम बदलने का असर मान लेते हैं. कुछ दिन दवा लेते हैं, आराम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि सब ठीक हो जाएगा.

लेकिन अगर यही परेशानी बारबार हो रही हो या कई हफ्तों तक बनी रहे, तो यह सिर्फ इंफेक्शन नहीं, बल्कि फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है. मैक्स पटपड़गंज अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में डॉ. समीर खत्री ने इसको लेकर कई जरूरी बाते बताईं.
एक्सपर्ट ने क्या कहा…
एक्सपर्ट कहते हैं कि फेफड़ों के कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआती लक्षण सामान्य श्वसन संक्रमण जैसे ही लगते हैं. इसलिए कई मरीज तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते, जब तक बीमारी काफी आगे नहीं बढ़ जाती.
इन संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें
तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहने वाली खांसी
पुरानी खांसी का अचानक बढ़ जाना या उसका स्वरूप बदल जाना
खांसी के साथ खून आना, चाहे मात्रा बहुत कम ही क्यों न हो
बारबार निमोनिया या छाती का संक्रमण होना
सांस फूलना या पहले की तुलना में जल्दी थक जाना
सीने में लगातार दर्द या भारीपन
आवाज का बैठ जाना
बिना किसी कारण वजन कम होना या भूख घटना
स्मोकिंग न करने वालों पर भी खतरा
एक और जरूरी बात यह है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं है. धूम्रपान इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक जरूर है, लेकिन पैसिव स्मोकिंग, वायु प्रदूषण, कुछ औद्योगिक रसायनों का लंबे समय तक संपर्क और पारिवारिक इतिहास भी इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं. आज हमारे देश में ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया.
कैंसर का डर बनता है मुसीबत
एक्सपर्ट कहते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हर लंबे समय तक रहने वाली खांसी का मतलब कैंसर नहीं होता. लेकिन अगर लक्षण 23 सप्ताह से ज्यादा बने रहें, इलाज के बावजूद ठीक न हों या बारबार लौट आएं, तो उन्हें नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है. ऐसे में विशेषज्ञ से सलाह लें. जरूरत पड़ने पर एक्सरे, सीटी स्कैन या अन्य जांच समय पर सही कारण का पता लगाने में मदद कर सकती हैं.
आज आधुनिक चिकित्सा ने फेफड़ों के कैंसर के इलाज में बड़ी प्रगति की है. यदि बीमारी शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए तो इलाज के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं और कई मरीज लंबे समय तक सामान्य एवं सक्रिय जीवन जीते हैं.



