Kanha Tiger Reserve CDV Virus:मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अप्रैल से अक्टूबर के बीच कान्हा टाइगर रिजर्व में 11 बाघों की मौत हुई है. इनमें से सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 8 बाघों की मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण पाई गई है. वहीं सितंबर और अक्टूबर में दो और बाघों की मौत के मामले सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इनकी मौत भी सीडीवी संक्रमण से हुई है या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है.

हाईकोर्ट ने राज्य शासन को 15 दिन के भीतर जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने यह भी पूछा है कि पिछले दो महीनों में कान्हा टाइगर रिजर्व में किसी अन्य शावक या वयस्क बाघ की मौत हुई है तो उसकी जानकारी और मौत का कारण भी बताया जाए. मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी. इस दौरान कोर्ट कान्हा में सीडीवी संक्रमण की स्थिति और बाघों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा.

CDV वायरस से 20 बाघों की मौत

मुंबई निवासी अधिवक्ता सुबित चक्रवर्ती की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में दावा किया गया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के संक्रमण से अब तक करीब 20 बाघों की मौत हो चुकी है. हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में अप्रैल से अक्टूबर के बीच 8 बाघों की मौत की वजह सीडीवी संक्रमण की पुष्टि हुई है. कोर्ट ने इसी अंतर और हालिया मौतों को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से कुत्तों के जरिए फैलती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संक्रमित कुत्तों की लार इस वायरस के संक्रमण का बड़ा माध्यम मानी जाती है. टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले आवारा कुत्ते वन्यजीवों के लिए संक्रमण का खतरा बन सकते हैं. यही वजह है कि कान्हा में बाघों की लगातार मौतों के बाद आवारा कुत्तों के वैक्सीनेशन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

संक्रमण के शुरुआती चरण में बाघ को सांस लेने में परेशानी, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. वायरस आगे बढ़ने पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है. बाघ को दौरे पड़ सकते हैं, वह अपना संतुलन खो सकता है और उसका व्यवहार बदल सकता है.

2700 आवारा कुत्तों को वैक्सीन की बूस्टर डोज दी गई

वन विभाग का कहना है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. कान्हा टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित गांवों के आवारा कुत्तों को सीडीवी वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है. इसके अलावा करीब 2700 आवारा कुत्तों को वैक्सीन की बूस्टर डोज भी दी गई है. एपीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एल. कृष्णमूर्ति के मुताबिक, प्रदेशभर में सीडीवी संक्रमण की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है. वन विभाग की ओर से उठाए गए इन कदमों के बावजूद बाघों की मौतों का मामला हाईकोर्ट की चिंता बढ़ा रहा है.

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में केवल बाघों की मौत और संक्रमण तक ही सवाल सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे खर्च का भी ब्यौरा मांगा है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पिछले 10 वर्षों में वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं के लिए मध्यप्रदेश को जारी की गई राशि की जानकारी देने को कहा है. इसके साथ ही टाइगर कंजर्वेशन प्लान, कोर और बफर क्षेत्र के निर्धारण, नियमित बैठकों और संरक्षण संबंधी अन्य गतिविधियों के बजट का विवरण भी मांगा गया है.

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से अब तक 8 बाघों की मौत हो चुकी है. इनमें 21 अप्रैल को मादा बाघ अमायनी का 11 महीने का नर शावक मृत मिला था. इसके बाद 23 अप्रैल को अमायनी का दूसरा शावक और 25 अप्रैल को तीसरा शावक मृत मिला. 29 अप्रैल को अमायनी की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि उसी दिन उसके चौथे नर शावक ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इसके बाद 19 मई को छह साल का नर बाघ, 23 जून को तीन साल का नर बाघ मृत मिला, वहीं 6 अक्टूबर को तीन साल की बाघिन की उपचार के दौरान मौत हो गई.

अब 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार को यह बताना होगा कि बाघों की मौतों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और वन्यजीव संरक्षण के लिए मिले बजट का किस तरह इस्तेमाल किया गया है. कान्हा में लगातार हो रही बाघों की मौतों के बीच हाईकोर्ट की सख्ती से वन विभाग और सरकार की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है.