बढ़ती कीमतों और ग्लोबल लेबल पर चल रहे तनाव का असर पहले दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर देखा गया. अब इसका असर भारत के टॉप शहरों में भी देखा जा रहा है. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक देश के सात प्रमुख शहरों में अप्रैलजून तिमाही के दौरान आवासीय बिक्री 6 प्रतिशत घटकर 90,715 इकाई रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक अनिश्चितता और मकानों की बढ़ती कीमतें इसकी प्रमुख वजह रही.

एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई महानगर क्षेत्र , दिल्लीराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र , पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में पिछले वर्ष की समान अवधि में कुल आवासीय बिक्री 96,285 इकाई रही थी. रिपोर्ट के अनुसार, इन सातों शहरों में 2025 की समान अवधि की तुलना में चालू तिमाही में मकानों की औसत कीमत में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

पश्चिम एशिया संकट का दिख रहा असर

दिलचस्प बात यह है कि एनारॉक के अप्रैलजून तिमाही के बिक्री आंकड़े हाल ही में सूचीबद्ध कंपनी प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट से पूरी तरह अलग हैं. प्रॉपइक्विटी ने चालू तिमाही में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 1,12,458 इकाई होने का दावा किया था. एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि ये आंकड़े अपेक्षित रुझान के अनुरूप हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध का असर पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र पर साफ दिखाई दिया. दरअसल पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न बाधाओं और सूचना प्रौद्योगिकी /आईटीईएस क्षेत्र में एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण अधिक खरीदार फिलहाल खरीदारी का फैसला टाल रहे हैं.

सात शहरों का ऐसा रहा प्रदर्शन

पुरी ने कहा कि अब आवासीय मांग में वृद्धि मुख्य रूप से प्रीमियम आवास, वैश्विक क्षमता केंद्र आधारित रोजगार केंद्रों और बुनियादी ढांचा विकास वाले क्षेत्रों तक सीमित होती जा रही है. एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, इन सात शहरों में अप्रैलजून तिमाही के दौरान नई आवासीय परियोजनाओं की पेशकश व आपूर्ति सात प्रतिशत बढ़कर 1,06,000 इकाई हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 98,625 इकाई थी. सलाहकार कंपनी ने कहा कि इस कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही में इन सातों शहरों में औसत आवासीय कीमत में सालाना आधार पर सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. दिल्लीएनसीआर में आवासीय कीमतों में सबसे अधिक 13 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई.