
Vastu Shastra: सनातन धर्म में मंदिर जाना महज एक धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि खुद को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने का एक रास्ता भी है. मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से मंदिर जाकर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन में आने वाली बाधाएं अपने आप ही कम होने लगती हैं. भगवान की पूजा में भाव और शुद्धि दोनों का महत्व है, लेकिन अक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे मंदिर जाने का पूर्ण फल हमें प्राप्त नहीं हो पाता. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोग मंदिर से आकर तुरंत पैर धो लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है. आइए जानते हैं कि मंदिर से आने के बाद तुरंत पैर क्यों नहीं धोना चाहिए और इस बारे में शास्त्र-पुराण क्या कहते हैं.
मंदिर से आने के बाद हाथ-पैर क्यों नहीं धोने चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, मंदिर परिसर एक उच्च ऊर्जा वाला क्षेत्र होता है. जब हम मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो वहां की सकारात्मक ऊर्जा हमारे भीतर समाहित हो जाती है. दर्शन के बाद जब हम घर लौटते हैं, तो वह दैवीय ऊर्जा हमारे साथ हमारे घर तक आती है. ऐसे में अगर हम तुरंत हाथ-पैर धो लेते हैं, तो जल के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा भी धुल जाती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए मंदिर की शांति को अपने भीतर बनाए रखने के लिए जरूरी है कि घर आने के बाद कम से कम 15-20 मिनट तक पानी ना छुएं. हालांकि, यह मान्यता है विज्ञान से मेल नहीं खाती है. लेकिन, चूंकि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है इसलिए लोग इसका पालन करते हैं.
मंदिर से लौटते समय इन 3 बातों का भी रखें ध्यान
मंदिर से निकलने के बाद इधर-उधर किसी दूसरे स्थान पर जाने या फालतू गपशप से बचना चाहिए. मंदिर से सीधे घर आना चाहिए ताकि वहां से मिली मानसिक शांति भंग न हो. अगर आप मंदिर में महादेव को जल अर्पित करने गए हैं, तो जल चढ़ाने के बाद खाली लोटा लेकर घर न आएं. उस लोटे में मंदिर का थोड़ा सा जल (चरणामृत स्वरूप) जरूर भर लें. मंदिर से लाए गए उस जल को घर के हर कोने में छिड़कें. मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है.






