
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 19 मार्च को अमराईवाड़ी से 2 करोड़ के नकली नोट जब्त किए, जिसके तार सूरत जिले की कामरेज तालुका के धोरण पारडी गांव तक पहुंचे हैं. तापी नदी के किनारे स्थित योग गुरु प्रदीप गुरुजी का ‘योगधाम’ फिलहाल पूरे इलाके में शक और चर्चा का केंद्र बना है.
2016-17 में गांव की जमीन के लगभग 70/50 वार हिस्से पर बना यह आश्रम स्थापना के बाद से ही रहस्यों के किले जैसा रहा है. गांव वालों के अनुसार, इस योग मंदिर के चारों ओर 20 फीट ऊंची दीवारें बनाई हई हैं, जिसकी किलाबंदी ऐसे की गई है कि अंदर चल रही कोई भी गतिविधि बाहर से नहीं दिखती. हैरानी की बात ये है कि इन सालों में आश्रम के दरवाते गांव के किसी भी नेता या आम व्यक्ति के लिए कभी नहीं खोले गए.
सिर्फ खास अनुयायियों को ही अंदर जाने की अनुमति थी और गांव वालों के अमुसार उनके लिए भी एक खास कोडवर्ज का इस्तेमाल किया जाता था. इतनी ज्यादा गोपनीयता के कारण गहरा शक है कि योग की आड़ में यहां कोई और संदिग्ध या गैर-कानूनी गतिविधि चल रही है.
गांव के लेखपाल शैलेशभाई के मुताबिक, यह आश्रम सरकारी रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड है. इसके टैक्स भी नियमति भरे जाते हैं. यह जनीन कानूनी दस्तावेजों के साथ खरीदी गई है. स्थानीय पुलिस ने इस आश्रम का कभी दौरा नहीं किया है. जबकि, इनमें आलीशान सुविधाएं और बेसमेंट भी मौजूद है. फिलहाल आश्रम के दरवाजे अंदर से बंद हैं और वहां किसी भी तरह की हलचल दिखाई नहीं दे रही है.
क्या क्राइम ब्रांट ने ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ सर्च ऑपरेशन भी किया?
सूत्रों के अनुसार, सूरत के वराछा में नकली नोट छापने का कान हो रहा था. इसलिए इस आश्रम को अभी तक स्थानीय पुलिस के पास आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं कराया गया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लेकिन इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की एक टीम यहां ऑफ द रिकॉर्ड आई थी, उसने गुपचुप तरीके से सर्च ऑपरेशन किया और जांच से जुड़े कुछ सुराग हासिल किए.
यह आश्रम साल 2019-20 में एक बड़े विवाद में भी घिर गया था. आश्रम के एक तरफ हलपतिवास स्थित है. स्थानीय युवकों ने देर रात आश्रम से कुछ अनजान लड़कियों को बाहर निकलते देखा और उनसे पूछताछ की. इस मामले पर गुरुजी ने विवाद खड़ा कर दिया और पुलिस को बुला लिया.




