शिमला। हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह के लोक निर्माण विभाग (PWD) में अब लंबे समय से मनपसंद स्टेशनों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने विभाग में बड़े स्तर पर युक्तीकरण (रेशनलाइजेशन) को मंजूरी दे दी है।

इस फैसले का असर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो वर्षों से सुविधाजनक स्थानों, जिला मुख्यालयों या अपने घरों के आसपास तैनात हैं। अब विभाग में जरूरत के हिसाब से स्टाफ की तैनाती होगी और जहां कर्मचारी अधिक हैं, वहां से उन्हें उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा, जहां तकनीकी अमले की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
PWD में अब नहीं चलेगा मनपसंद स्टेशन का मोह
विक्रमादित्य सिंह के लोक निर्माण विभाग में लंबे समय से अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती में असंतुलन की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई जगह स्वीकृत पदों के मुकाबले अधिक स्टाफ तैनात है, जबकि दूसरी ओर दूरदराज के क्षेत्रों में जरूरी पद खाली पड़े हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले को विभागीय व्यवस्था दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब केवल सुविधाजनक स्टेशन पर बने रहने के बजाय अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती विभाग की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय होगी। हालांकि, किस अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कहां होगा, इसकी विस्तृत तस्वीर विभागीय आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बड़े स्तर पर युक्तीकरण की तैयारी
मंत्री विक्रमादित्य सिंह के जिम्मे लोक निर्माण विभाग में यह फैसला प्रशासनिक और विभागीय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। सरकार का जोर ऐसे स्थानों पर तकनीकी स्टाफ उपलब्ध करवाने पर है, जहां सड़क निर्माण, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों के लिए अधिकारियों की कमी बनी हुई है।
युक्तीकरण लागू होने के बाद विभाग में तैनाती के पुराने समीकरण बदल सकते हैं। खासकर उन स्थानों पर इसका असर पड़ने की संभावना है, जहां स्वीकृत पदों से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति विशेष की पहुंच या सिफारिश के आधार पर तैनाती होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
घर के आसपास तैनाती बनाए रखना होगा मुश्किल
विभाग में प्रस्तावित बदलाव उन कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अहम होंगे, जो लंबे समय से अपने गृह क्षेत्र या घर के नजदीक तैनात हैं। यदि किसी मंडल, उपमंडल या विंग में जरूरत से अधिक स्टाफ पाया जाता है, तो वहां से कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्रों में भेजा जा सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसका मतलब है कि अब मनपसंद स्टेशन पर लंबे समय तक बने रहने की व्यवस्था पर पुनर्विचार हो सकता है। दूरदराज के क्षेत्रों में रिक्त पदों को भरने के लिए ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी, जहां उनकी जरूरत अधिक है। इससे विभाग में स्टाफ के वितरण को संतुलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चंबा से सिरमौर तक खाली पद भरने पर रहेगा जोर
विभागीय जानकारी के अनुसार, चंबा, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और शिमला के दूरदराज इलाकों में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता जैसे तकनीकी पद लंबे समय से खाली रहने की समस्या रही है। इसके विपरीत, कुछ जिला मुख्यालयों और सुविधाजनक मंडलों में एक स्वीकृत पद के मुकाबले दो से तीन अधिकारी या कर्मचारी संबद्ध बताए गए हैं। ऐसी स्थिति में युक्तीकरण के जरिए अतिरिक्त स्टाफ को जरूरत वाले क्षेत्रों में भेजने की योजना है। यदि यह प्रक्रिया प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क निर्माण तथा रखरखाव के कामों को गति मिल सकती है।
नेशनल हाईवे विंग में भी बदलेगा स्टाफ का समीकरण
लोक निर्माण विभाग के नेशनल हाईवे विंग में भी काम का दायरा पहले के मुकाबले कम हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपे जाने के बाद विभागीय एनएच विंग के पास 779 किलोमीटर सड़कों की जिम्मेदारी शेष रहने की जानकारी दी गई है। पहले इस विंग के पास 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य उपलब्ध थे, जबकि अब यह राशि घटकर करीब 750 करोड़ रुपये बताई गई है। काम का दायरा घटने के साथ यहां तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाओं का दूसरे क्षेत्रों में उपयोग करने की संभावना भी बढ़ गई है।
तीन एजेंसियों में बंटी 2,592 किलोमीटर NH की जिम्मेदारी
प्रदेश में कुल 25 राष्ट्रीय राजमार्गों की 2,592 किलोमीटर लंबाई की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों के पास है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 1,244 किलोमीटर सड़कें NHAI, 569 किलोमीटर सीमा सड़क संगठन (BRO) और 779 किलोमीटर लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग के अधीन हैं। ऐसे में एनएच विंग के पास काम का दायरा सीमित होने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा को जरूरी माना जा रहा है। विभाग में युक्तीकरण के जरिए उपलब्ध मानव संसाधन को उन क्षेत्रों में लगाया जा सकता है, जहां तकनीकी अमले की ज्यादा आवश्यकता है।
स्टाफ का सही इस्तेमाल और विकास कार्यों पर फोकस
सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विभाग में कर्मचारियों की संख्या और काम की जरूरत के बीच संतुलन बनाना है। एक ओर जहां अतिरिक्त स्टाफ वाले कार्यालयों में तैनाती की समीक्षा होगी, वहीं दूसरी ओर खाली पदों से प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे सड़क निर्माण, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों की निगरानी मजबूत हो सकती है। अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर युक्तीकरण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और इसके तहत अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नई तैनाती को लेकर क्या आदेश जारी होते हैं।



