चारा घोटाले के एक मामले में 25 साल से फरार चल रहे आरोपी सत्येंद्र कुमार को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है. सीबीआई ने उसकी गतिविधियों पर नेपाल से भारत तक नजर रखी थी. गुरुवार आधी रात के आसपास मध्य प्रदेश के गुना से लखनऊ जा रही ट्रेन में यात्रा करते समय उसे लखनऊ रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया.

मुकदमे की सुनवाई में पेश न होने के कारण उसे पहले भगोड़ा घोषित किया गया था. सीबीआई ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. एजेंसी ने बताया कि चारा घोटाले के मामले में वर्ष 2001 में आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद सत्येंद्र अंडर ग्राउंड हो गया था और 25 साल से ज्यादा समय से फरार था. उसके खिलाफ गिरफ्तारी का स्थायी वारंट जारी किया गया था.

सीबीआई ने कैसे लगाया पता?

सीबीआई के जांचकर्ताओं ने भौतिक निगरानी, तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के जरिए सत्येंद्र का पता लगाने की कोशिश की. फिर अंततः उसके नेपाल में होने की बात सामने आई. बाद में जांचकर्ताओं को जानकारी मिली कि उसने हाल ही में भारत में प्रवेश किया है.

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, आरोपी ने हाल ही में भारत में प्रवेश किया था और वह 22 अक्टूबर 2026 को ट्रेन से गुना से लखनऊ जा रहा था. विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी को गुना से लखनऊ के रास्ते में गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई की एक विशेष टीम गठित की गई.

ट्रेन के पहुंचने के पहले ही अधिकारियों को किया गया था तैनात

प्रवक्ता के मुताबिक, ट्रेन के पहुंचने से पहले ही सीबीआई के अधिकारियों को लखनऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात कर दिया गया था. उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 22 अक्टूबर की आधी रात के आसपास सत्येंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया. सीबीआई के अनुसार, सत्येंद्र को सक्षम अदालत में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड पर झारखंड के रांची लाया जा रहा है.

क्या है चारा घोटाला मामला?

चारा घोटाला एक बहुत बड़ा घोटाला था. 1985 से 1995 के बीच पुराने बिहार के कई जिलों में सरकारी खजाने से धोखाधड़ी करके पैसा निकाला गया था. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को इस घोटाले के पांचवें मामले में 5 साल की जेल की सजा सुनाई और 60 लाख रुपये जुर्माना लगाया. यह घोटाला कुल 64 मामलों का है. इनमें से 53 मामलों की सुनवाई रांची में हुई. आखिरी मामले में कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद समेत 75 आरोपियों को दोषी ठहराया.

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