
Liquid Planet Discovery: हमारे स्पेस में कई ऐसे रहस्य छिपे हुए हैं, जो आज भी विज्ञान की नजरों से बहुत दूर हैं. अब वैज्ञानिकों को एक ऐसा ग्रह मिला है, जो बिल्कुल अलग तरह का है. यहां न तो ठोस जमीन है और न ही पानी के महासागर हैं. इसकी सतह पिघली हुई है, जैसे हर तरफ लावा ही लावा हो. हैरानी की बात यह है कि इस ग्रह के आसपास ऐसी गैसें भी मौजूद हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आप इस ग्रह के करीब जाएंगे, तो आपको सड़े हुए अंडों जैसी बदबू आएगी. कई लोग इसको ‘नरक’ जैसा दिखने वाला ग्रह बता रहे हैं. हम यहां आपको इस अजीबोगरीब ‘लिक्विड प्लेनेट’ की कहानी बताने जा रहे हैं.
पिघला हुआ ‘नरक’ है यह ग्रह
वैज्ञानिकों ने इस ग्रह को HD 189733b के रूप में पहचाना है. यह एक हॉट जुपिटर (Hot Jupiter) के अंतर्गत आने वाला ग्रह है. इसकी सतह ठोस नहीं है, बल्कि यह अत्यधिक तापमान के कारण पिघली हुई और लिक्विड अवस्था में है. यहां केवल बदबू ही नहीं, बल्कि इसका मौसम भी जानलेवा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर कांच (Glass) की बारिश होती है और हवाएं 5,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं.
क्यों आती है सड़े हुए अंडों जैसी बदबू?
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से मिले डेटा का विश्लेषण करने के बाद इस राज से पर्दा उठा है. वैज्ञानिकों को इस ग्रह के वायुमंडल में हाइड्रोजन सल्फाइड के अणु मिले हैं. पृथ्वी पर यही गैस सड़े हुए कार्बनिक पदार्थों और अंडों में दुर्गंध पैदा करती है. ग्रह पर सल्फर की मौजूदगी यह बताती है कि इसका निर्माण और विकास बहुत ही हिंसक और गर्म परिस्थितियों में हुआ है.
कैसी है इस ग्रह की दुनिया
यह ग्रह आकार में हमारी धरती से बड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसके हालात बिल्कुल अलग हैं. यह हमेशा पिघली हुई स्थिति में रहता है. यहां जमीन जैसी कोई चीज नहीं है. यह पूरी सतह गर्म और नरम लावा से भरी हुई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति को वैज्ञानिक एक नई तरह की ग्रह श्रेणी मान रहे हैं, जो अब तक कम ही देखी गई है.
इतनी गर्मी कि कुछ भी टिके नहीं
इस ग्रह का तापमान बहुत ज्यादा है. यहां इतनी गर्मी है कि पत्थर भी पिघल जाते हैं. ऐसे में वहां किसी भी तरह के जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है. अगर कोई चीज वहां पहुंचे, तो वह कुछ ही समय में पिघल जाएगी. अब सवाल उठता है कि यह ग्रह ठंडा होकर ठोस क्यों नहीं बनता. वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके चारों तरफ गैसों की मोटी परत है, जो अंदर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देती. इसके अलावा आसपास के अन्य ग्रहों का खिंचाव भी इसके अंदर गर्मी पैदा करता रहता है. इसी वजह से यह हमेशा उबलती हुई हालत में बना रहता है.
क्यों खास है यह खोज
अब तक ज्यादातर छोटे ग्रहों को या तो पत्थरीला माना जाता था या फिर पानी से भरा हुआ. लेकिन यह ग्रह इन दोनों से अलग है. यह न पूरी तरह ठोस है और न ही तरल पानी वाला, बल्कि एक तरह का पिघला हुआ संसार है. इससे यह समझ आता है कि अंतरिक्ष में हमारी सोच से कहीं ज्यादा अलग-अलग तरह के ग्रह मौजूद हो सकते हैं. यहां इतनी गर्मी और जहरीली गैसों के बीच जीवन की संभावना लगभग न के बराबर है. लेकिन इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि शुरुआत में पृथ्वी और अन्य ग्रह ठंडे होने से पहले कैसे दिखते रहे होंगे. यह ग्रह हमारे सौर मंडल के चंद्रमा (Io) का एक बड़ा रूप लगता है, जो सबसे ज्यादा ज्वालामुखी वाला पिंड है.




