
Amazing Facts : ऑपरेशन थिएटर ठंडा रखा जाता है ताकि डॉक्टरों को पसीना न आए, संक्रमण का खतरा कम हो और मशीनें सही काम करें. मरीज को ठंड से बचाने के लिए अलग से गर्म रखने के उपाय किए जाते हैं. अस्पताल की सफेद गलियारों से गुजरते हुए जब कोई मरीज ऑपरेशन थिएटर (OT) के दरवाजे के अंदर कदम रखता है, तो सबसे पहली चीज जो उसे महसूस होती है, वह है वहां की ठिठुरन वाली ठंड. बाहर चाहे कितनी ही चिलचिलाती गर्मी क्यों न हो, OT के अंदर का नजारा हमेशा शिमला-मनाली जैसा ही रहता है. कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इतनी ठंड क्यों रखी जाती है? क्या यह बैक्टीरिया को मारने के लिए है या फिर डॉक्टरों को आरामदायक महसूस कराने के लिए? क्या इतनी ठंड में सर्जन के हाथ नहीं कांपते? इस ‘चिलिंग’ साइंस के पीछे छिपे लॉजिक को समझना बेहद दिलचस्प है, क्योंकि यह केवल आराम की बात नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा और सर्जरी की सफलता से जुड़ा मामला है.
पसीने की एक बूंद भी बन सकती है जानलेवा खतरा
ज्यादातर अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर का तापमान $18°C$ से $23°C$ के बीच सेट किया जाता है, जबकि कुछ विशेष सर्जरी के लिए इसे $16°C$ तक भी गिरा दिया जाता है. इसके साथ ही नमी (Humidity) को भी $20$% से $60$% के बीच फिक्स रखा जाता है. इस कड़ाके की ठंड की सबसे बड़ी वजह सर्जन और मेडिकल स्टाफ की सुविधा है. ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर स्क्रब, स्टेराइल गाउन, कैप, मास्क और ग्लव्स जैसी कई परतों वाले कपड़े पहनते हैं. इसके ऊपर से सिर पर जलने वाली तेज सर्जिकल लाइट्स काफी ज्यादा गर्मी पैदा करती हैं. अगर कमरा ठंडा न हो, तो डॉक्टर को पसीना आ सकता है. पसीने की एक भी बूंद अगर खुले घाव या स्टेराइल उपकरणों पर गिर जाए, तो संक्रमण (Infection) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए, यह ठंडक उन्हें पसीने से दूर और मानसिक रूप से फोकस रखती है.
मशीनों की सेहत और बैक्टीरिया पर लगाम
OT के भीतर केवल इंसान ही नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों की हाई-टेक मशीनें भी काम कर रही होती हैं. लैप्रोस्कोपिक सिस्टम, मॉनिटर्स और इलेक्ट्रो-सर्जिकल यूनिट्स लगातार चलने के कारण काफी ऊष्मा (Heat) पैदा करते हैं. अगर वातावरण ठंडा न हो, तो ये सेंसिटिव मशीनें ओवरहीट होकर खराब हो सकती हैं या गलत रीडिंग दे सकती हैं. इसके अलावा, एक आम धारणा यह है कि ठंड बैक्टीरिया को मार देती है. हालांकि ठंड बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म नहीं करती, लेकिन यह उनकी पनपने की रफ्तार को काफी धीमा जरूर कर देती है. गर्म और नमी वाले माहौल में कीटाणु तेजी से बढ़ते हैं, जबकि ठंडा और ड्राई वातावरण संक्रमण को फैलने से रोकने में एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.
सर्दी में सर्जन के हाथ और मरीज की सुरक्षा का सच
अक्सर लोग डरते हैं कि इतनी ठंड में डॉक्टर के हाथ कांपने से सर्जरी बिगड़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होता. सालों की कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग से सर्जन अपने हाथों की मांसपेशियों पर गजब का नियंत्रण पा लेते हैं. वे आर्म रेस्ट और विशेष पोजीशन का इस्तेमाल करते हैं जिससे हाथ स्थिर रहें. हैरानी की बात यह है कि यह ठंडक मरीज के लिए कई बार चुनौतीपूर्ण होती है. बहुत कम तापमान से मरीज का इम्यून सिस्टम सुस्त पड़ सकता है या खून का बहाव धीमा हो सकता है. इसीलिए, जहां डॉक्टर ठंड में काम करते हैं, वहीं मरीज को सुरक्षित रखने के लिए वार्म ब्लैंकेट्स, फोर्स्ड एयर वार्मर और शरीर में चढ़ाए जाने वाले फ्लूइड्स को गर्म करके दिया जाता है. यानी एक ही कमरे में डॉक्टर के लिए सर्दी और मरीज के लिए गर्मी का संतुलन बनाया जाता है.