Monday, March 9, 2026
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इजरायल की ब्लू स्पैरो मिसाइल के आगे क्यों फेल हो जाते हैं एयर डिफेंस सिस्टम? अंतरिक्ष से सीधा दुश्मन खल्लास!..

इजरायल की ब्लू स्पैरो मिसाइल के आगे क्यों फेल हो जाते हैं एयर डिफेंस सिस्टम? अंतरिक्ष से सीधा दुश्मन खल्लास!..
इजरायल की ब्लू स्पैरो मिसाइल के आगे क्यों फेल हो जाते हैं एयर डिफेंस सिस्टम? अंतरिक्ष से सीधा दुश्मन खल्लास!..

यरुशलम: इजराइल की ‘ब्लू स्पैरो’ मिसाइल इस वक्त दुशमनों के डिफेंस एक्सपर्ट्स के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई है. राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने ऐसी मिसाइल तैयार की है जो तगड़े एयर डिफेंस सिस्टम्स को भी फेल कर देती है. खामेनेई को मारने के लिए यही मिसाइल दागी गई थी. ये मिसाइल अंतरिक्ष से जब खामेनेई के बंकर वाली बिल्डिंग पर गिरी तो वहां मौजूद सबकुछ राख में तब्दील हो गया. आगे जानें इस मिसाइल के आगे सारे डिफेंस सिस्टम डिफेंसलेस कैसे हो जाते हैं?

अंतरिक्ष के करीब जाकर सीधा नीचे
ज्यादातर मिसाइलें जमीन के समानांतर या एक निश्चित ऊंचाई पर उड़ती हैं, जिन्हें रडार आसानी से पकड़ लेते हैं लेकिन ‘ब्लू स्पैरो’ लॉन्च होने के बाद सीधे एक्सो एटमॉस्फेरिक फेज यानी अंतरिक्ष की दहलीज पर चली जाती है. इतनी ऊंचाई पर मौजूद मिसाइल को जमीन पर लगे रडार देख ही नहीं पाते.

दुनिया के ज्यादातर एंटी-एयरक्राफ्ट रडार ‘क्षितिज’ को स्कैन करते हैं, यानी वो सामने से आने वाले खतरे को देखते हैं. ‘ब्लू स्पैरो’ अंतरिक्ष से 90 डिग्री के कोण पर सीधे नीचे गिरती है. रडार के ठीक ऊपर एक ‘ब्लाइंड स्पॉट’ होता है, जहां वह देख नहीं पाता. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जब तक रडार को पता चलता है, तब तक मिसाइल सिर पर पहुंच चुकी होती है.

हाइपरसोनिक रफ्तार: पलक झपकने का भी समय नहीं
जब यह मिसाइल अंतरिक्ष से नीचे गिरती है, तो गुरुत्वाकर्षण और इसके इंजन की ताकत इसे हाइपरसोनिक रफ्तार देती है यानी ये मिसाइल ध्वनि की गति से कई गुना तेज दौड़ती है. इसकी रफ्तार इतनी ज्यादा होती है कि दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को जीरो रिएक्शन टाइम मिलता है.

हवा से लॉन्च
इसे जमीन से नहीं, बल्कि F-15 ईगल जैसे लड़ाकू विमानों से हवा में छोड़ा जाता है. इससे पायलट दुश्मन की सीमा में घुसे बिना, 2,000 किलोमीटर दूर से ही निशाना साध सकता है. 1,900 किलो वजनी यह मिसाइल एक उड़ते हुए ‘मौत के पहाड़’ जैसी है.

पाताल में छिपे बंकरों का काल
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी इसकी ‘काइनेटिक एनर्जी’ है. इतनी ऊंचाई और रफ्तार से गिरने के कारण इसमें इतनी ताकत पैदा हो जाती है कि यह कंक्रीट की कई मीटर मोटी परतों को चीरकर गहरे अंडरग्राउंड बंकरों और कमांड सेंटर्स को मलबे में तब्दील कर देती है.

me.sumitji@gmail.com

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