Saturday, August 30, 2025
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जब चलती ट्रेन के दौरान ड्राइवर को Toiletˈ लगती है तो क्या रोक दी जाती है ट्रेन? जानिए इस मुश्किल हालात से रेलवे कैसे निपटता है

जब चलती ट्रेन के दौरान ड्राइवर को Toiletˈ लगती है तो क्या रोक दी जाती है ट्रेन? जानिए इस मुश्किल हालात से रेलवे कैसे निपटता है
जब चलती ट्रेन के दौरान ड्राइवर को Toiletˈ लगती है तो क्या रोक दी जाती है ट्रेन? जानिए इस मुश्किल हालात से रेलवे कैसे निपटता है

Indian Railways Loco Pilots Rule: भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए हर दिन कोई ना कोई योजना बनाती रहती है। रेलवे के टिकट का दाम हर श्रेणी के लोगों के लिए बनाया गया है। इसके अलावा ट्रेन में भी हर सुविधा प्रदान की गई है। चाहे वो सोने की व्यवस्था हो, बैठने की हो, सर्दी-गर्मी की हो या फिर बाथरूम में टॉयलेट जाना हो। भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए हर सुविधा दी है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर यानी लोको पायलट को ट्रेन चलाने के बीच टॉयलेट जाना हो तो वो क्या करते हैं?

लोको पायलट भी इंसान होता है और नेचर कॉलिंग उसे भी समय समय पर आती ही होगी। ऐसे में अगर ट्रेन चलाने के बीच में उन्हें बाथरूम जाने की नौबत आती है तो इसके लिए भी भारतीय रेलवे का एक नियम है। इस नियम के बारे में अगर आपने कभी नहीं सोचा हो तो चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

ट्रेन चलाने के बीच लोको पायलट के नियम (Indian Railways Loco Pilots Rule)

ट्रेन में सफर करते समय लोगों को टॉयलेट तो जाना होता ही है। इसके लिए ट्रेन में वॉशरूम की सुविधा भी भारतीय रेलवे ने दी है जो हर बोगी में दोनों तरफ बना होता है। भारतीय रेलवे ने लोको पायलट के लिए एक खास रूल बनाया है। नियम के मुताबिक, ट्रेन चलाने की ड्यूटी शुरू होने से पहले लोको पायलट को फ्रेश होना जरूरी है। जिसके बाद कम से कम 3 से 4 घंटे उन्हें लगातार ट्रेन चलानी होती है। इस दौरान अगर उन्हें टॉयलेट लगती भी है तो उन्हें बर्दाश्त करना होता है।

ऐसा नियम इसलिए भी है कि ट्रेन चलाने के दौरान उन्हें किसी तरह की कोई समस्या का सामना कभी नहीं करना पड़े। वहीं किसी लोको पायलट को अगर ट्रेन चलाने के बीच में इमरजेंसी में वॉशरूम जाने की नौबत आई तो भी एक नियम भारतीय रेलवे ने बनाया है। इमरजेंसी में अगर लोको पायलट को वॉशरूम जाने की जरूरत होती है तो उन्हें कंट्रोल रूम से उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन रोकने की परमिशन मिल जाए। परमिशन मिलने पर ट्रेन रुकती है और वो जाकर फ्रेश हो सकते हैं।

बता दें, भारतीय रेलवे के कुछ ऐसे नियम हैं जो लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। फिर चाहे ये नियम यात्रियों के लिए हो या उनके स्टाफ के लिए हो, ये सभी को मानने होते हैं। लोको पायलट की ड्यूटी 8 घंटे की होती है लेकिन अगर उन्हें बीच में टॉयलेट जाना भी होता है तो उन्हें कम से कम 3-4 घंटे तक ट्रेन चलाना ही होता है।

me.sumitji@gmail.com

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