Thursday, February 19, 2026
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क्या थी तमन्‍ना मलिक की मन्नत? तीन साल बाद बुर्का पहनकर उठाया कांवड़, प्रोपेगेंडा या आस्था- यूजर्स उठा रहे सवाल

क्या थी तमन्‍ना मलिक की मन्नत? तीन साल बाद बुर्का पहनकर उठाया कांवड़, प्रोपेगेंडा या आस्था- यूजर्स उठा रहे सवाल

संभल की तमन्ना मलिक ने बुर्का पहनकर हरिद्वार से पैदल कांवड़ यात्रा कर गंगाजल लाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. महाशिवरात्रि पर वे अपने गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक कर अपनी मन्नत पूरी करने जा रही हैं.

क्या थी तमन्‍ना मलिक की मन्नत? तीन साल बाद बुर्का पहनकर उठाया कांवड़, प्रोपेगेंडा या आस्था- यूजर्स उठा रहे सवाल

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की रहने वाली तमन्ना मलिक इन दिनों बहुत चर्चा में हैं. उन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लेकर बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा की है. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोग काफी हैरान हो गए. कुछ लोग उनकी इस यात्रा की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करना ठीक है या नहीं. तमन्ना ने खुद बताया कि यह उनकी बहुत निजी और आस्था से जुड़ी बात है.

उन्होंने भगवान शिव से एक मन्नत मांगी थी कि गांव के अमन त्यागी से उनकी शादी हो जाए. तीन साल पहले उनकी यह मन्नत पूरी हुई और उन्होंने अमन से लव मैरिज कर ली. अब उनके दो छोटे-छोटे बेटे भी हैं आर्यन और यक्ष. शादी पूरी होने के बाद तमन्ना ने वादा निभाया और इस बार महाशिवरात्रि के मौके पर हरिद्वार से पैदल कांवड़ उठाकर गंगाजल लाईं. वे इसे अपने गांव के क्षेमनाथ (या चैमनाथ) शिव मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए ले जा रही हैं.

प्रोपेगेंडा या आस्था?

हालांकि कुछ लोग तमन्ना की आस्था का सम्मान कर रहे है लेकिन कुछ लोग सवाल भी उठा रहे है कि आखिर बुर्का पहनने की क्या जरूरत थी. एक ने कहा, ‘इनको बुर्का पहनने की जरूरत क्यों पड़ी.’ दूसरे ने लिखा, ‘जब इन्हें इतना ही हमारे धर्म से लगाओ है इतना ही प्यार कर रही है तो कपड़े भी हिंदू धर्म वाली पहन लेती तो अच्छा लगता.’ एक ने कहा, ‘लेकिन हरिद्वार में तो गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है.’ तो सवाल यह उठता है कि क्या तमन्ना हरिद्वार से ही बुर्का पहनकर निकली थी या बीच रस्ते में उन्हें ऐसा करने का ख्याल आया.

क्या प्रशासन और जनता का रिएक्शन?

रास्ते में जहां-जहां तमन्ना गईं, वहां लोगों ने उनका बहुत जोरदार स्वागत किया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कई जगहों पर महिलाएं और पुरुष उनके पास आए, फोटो खिंचवाई, आशीर्वाद लिया और बातें कीं. कुछ लोगों ने उन्हें पैसे और तोहफे भी दिए. इतनी भीड़ इकट्ठा हो गई कि जैसे किसी बड़े नेता या सेलिब्रिटी का स्वागत हो रहा हो. पुलिस और स्वयंसेवकों ने उनकी सुरक्षा के लिए चारों तरफ घेरा बनाया और साथ चलकर उनकी रक्षा की. संभल के सर्किल ऑफिसर कुलदीप सिंह ने कहा कि तमन्ना का वीडियो वायरल होने से लोगों की दिलचस्पी बहुत बढ़ गई है. इसलिए पुलिस ने सभी कांवड़ियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा के लिए खास इंतजाम किए हैं.

क्या होनी चाहिए थी तमन्ना पर पाबंदी?

कई जगहों पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें फूलों से स्वागत किया और ‘हर हर महादेव’ के नारे लगाए. तमन्ना के पति अमन त्यागी भी पूरी यात्रा में उनके साथ रहे. अमन ने कहा कि बुर्का पहनने या न पहनने से फर्क नहीं पड़ता, तमन्ना को हर जगह सम्मान मिला. शुरुआत में थोड़ी मुश्किल हुई, लेकिन ज्यादातर जगहों पर प्रशासन ने उनका पूरा साथ दिया. कुछ लोगों की आलोचना पर तमन्ना ने साफ कहा कि किसी बहन को बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने से नहीं रोकना चाहिए. कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए जो कोई भी सनातन धर्म का पालन करना चाहे, उसे बिना डर के आजादी मिलनी चाहिए.

पैरों पर पड़े छाले

अब तमन्ना अपनी यात्रा के आखिरी हिस्से में हैं. पैरों में छाले पड़ गए हैं, लेकिन उनकी श्रद्धा कम नहीं हुई है. वे महाशिवरात्रि के दिन संभल के शिव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करना चाहती हैं. रास्ते भर ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम भोले’ के जयकारे गूंजते रहे हैं।यह कहानी आस्था, प्रेम और भाईचारे की एक खूबसूरत मिसाल बन गई है, जहां धर्म की दीवारें कमजोर पड़ जाती हैं और सिर्फ भक्ति और इंसानियत बाकी रह जाती है.

me.sumitji@gmail.com

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