शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वर्ण आयोग यानी सामान्य वर्ग आयोग के गठन की मांग अब जोर पकड़ती जा रही है। इस मुद्दे पर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है और अब सुक्खू सरकार के दो मंत्रियों ने खुलकर अपनी आवाज बुलंद कर दी है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बाद लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी स्वर्ण आयोग के गठन के समर्थन में उतर आए हैं। विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर विधानसभा में इस मुद्दे पर दिए गए अपने वक्तव्य का वीडियो साझा करते हुए साफ कर दिया कि सामान्य वर्ग आयोग की मांग को लेकर उनका रुख पहले भी स्पष्ट था और आज भी वह इस मांग के साथ मजबूती से खड़े हैं।

 

दो मंत्रियों के समर्थन के बाद स्वर्ण आयोग का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन गया है। खास बात यह है कि विक्रमादित्य सिंह ने अपने संदेश में दो टूक अंदाज अपनाते हुए कहा कि वह जो कहते हैं, पूरी मजबूती के साथ कहते हैं। उनके इस बयान को सामान्य वर्ग आयोग की मांग के समर्थन में उनकी स्पष्ट राजनीतिक स्थिति के तौर पर देखा जा रहा है।

 

विक्रमादित्य सिंह का संदेश- हम जो कहते हैं, ठोक बजाकर कहते हैं

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम जो कहते हैं, पूरी मजबूती और ठोक बजाकर कहते हैं।” उन्होंने कहा कि विधानसभा का सदन हो या प्रदेश की जनता के बीच उठने वाली आवाज, स्वर्ण आयोग के गठन को लेकर उनका पक्ष हमेशा साफ रहा है। वह इस मांग से पीछे नहीं हटे हैं और आगे भी इसके समर्थन में खड़े रहेंगे।

 

 

 

विक्रमादित्य सिंह ने अपने संदेश के जरिए यह जताने की कोशिश की कि स्वर्ण आयोग का विषय उनके लिए कोई नया मुद्दा नहीं है। वह पहले भी विधानसभा के भीतर इस मांग को उठा चुके हैं और अब एक बार फिर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन दोहराया है। उनके इस बयान के बाद सामान्य वर्ग आयोग के गठन को लेकर चल रही चर्चा को नई गति मिली है।

किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, हर हिमाचली के सम्मान और अधिकार की बात’

विक्रमादित्य सिंह ने स्वर्ण आयोग के गठन की जरूरत बताते हुए कहा कि प्रदेश में अलग-अलग वर्गों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े विषयों पर आयोग काम कर रहे हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसे में सामान्य वर्ग के लोगों की मांग पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस मांग को किसी दूसरे वर्ग के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सभी वर्गों के सम्मान और विकास से जोड़कर समझने की जरूरत है।

 

 

मंत्री ने अपने संदेश में समावेशी विकास पर जोर देते हुए कहा कि उनकी लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के हर वर्ग का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इस मामले को लेकर सरकार के स्तर पर सकारात्मक और ठोस कदम सामने आएंगे। विक्रमादित्य सिंह ने अपने संदेश का समापन करते हुए कहा, “सबका सम्मान, सबका अधिकार-हर हिमाचली का विकास ही हमारा संकल्प!” इस नारे के माध्यम से उन्होंने स्वर्ण आयोग की मांग को समान सम्मान और अधिकारों की बहस से जोड़ने का प्रयास किया।

 

मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी दे चुके हैं खुला समर्थन

स्वर्ण आयोग की मांग को लेकर सुक्खू सरकार के भीतर से समर्थन की आवाजें लगातार चर्चा में हैं। इससे पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी सामान्य वर्ग आयोग के गठन की मांग का समर्थन किया था। अब विक्रमादित्य सिंह के खुलकर सामने आने से इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।

 

 

 

अनिरुद्ध सिंह ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और वर्ग को अपनी बात रखने तथा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। यदि अलग-अलग वर्गों के लिए आयोग बनाए जा सकते हैं, तो सामान्य वर्ग आयोग के गठन की मांग पर भी विचार करने में कोई हर्ज नहीं है।

 

अनिरुद्ध सिंह ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया था कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और इस विषय पर बातचीत करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि लोगों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनकी समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।

सचिवालय के बाहर प्रदर्शन से गरमाया था मामला

स्वर्ण आयोग के गठन की मांग ने उस समय जोर पकड़ा, जब राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के नेतृत्व में सामान्य वर्ग के लोगों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सामान्य वर्ग आयोग के गठन के साथ-साथ यूजीसी से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी मांगें उठाईं। इस दौरान करणी सेना से जुड़े लोगों की भागीदारी का भी जिक्र सामने आया।

 

स्वर्ण आयोग की मांग पर बढ़ी सियासी नजरें

हिमाचल प्रदेश में स्वर्ण आयोग के गठन की मांग अब केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गई है। सरकार के दो मंत्रियों के सार्वजनिक समर्थन के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। एक ओर सामान्य वर्ग के संगठन आयोग के गठन की मांग को लेकर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार के भीतर से उठ रही समर्थन की आवाजों ने इस विषय को नई अहमियत दे दी है।