शिमला। देवभूमि हिमाचल प्रदेश की राजनीति इस समय वित्तीय मोर्चे पर छिड़े एक महासंग्राम की वजह से पूरी तरह उबाल पर है। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर विकास कार्यों और देनदारियों के नाम पर 400 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है, और इसी के साथ प्रदेश में सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है।

 

राज्य पर बढ़ते कर्ज के अंबार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ चुके हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर एक-दूसरे पर अंधाधुंध कर्ज लेने और प्रदेश की अर्थव्यव्सथा को पटरी से उतारने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिससे सूबे का राजनीतिक तापमान अचानक काफी बढ़ गया है।

सीएम सुक्खू, बोले- विरासत में मिला था खाली खजाना

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि 31 मार्च 2023 तक हिमाचल प्रदेश पर पूर्व की सरकारों से विरासत में 76,633 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज और कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां मिली थीं।

 

आरडीजी बंद ना होती तो आत्मनिर्भर होता हिमाचल

सीएम ने तर्क दिया कि जून 2022 में जीएसटी कंपनसेशन बंद होने और अब केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में कटौती से प्रदेश की आर्थिकी पर भारी दबाव पड़ा है। यदि आरडीजी ग्रांट बंद न होती, तो हिमाचल आज आत्मनिर्भर बनने की राह पर बहुत आगे निकल चुका होता। मुख्यमंत्री ने आंकड़ों की बाजीगरी पर तंज कसते हुए कहा कि जयराम ठाकुर के कार्यकाल में धड़ाधड़ 43,261 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया, जबकि उनकी वर्तमान सरकार ने अब तक तुलनात्मक रूप से कम यानी 37,781 करोड़ रुपये का ही कर्ज लिया है।

 

 

जयराम ठाकुर का पलटवार, मुख्यमंत्री लोन प्रिय हो गए हैं

दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार के इन दावों की हवा निकालते हुए बेहद तीखा हमला बोला है। जयराम ठाकुर ने दावा किया कि उनके पांच साल के कार्यकाल में केवल 19 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था, जबकि मौजूदा सुक्खू सरकार के महज चार साल के कार्यकाल में ही कर्ज का यह आंकड़ा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है।

 

 

 

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जहां सरकारें अपने विकास कार्यों और मुख्यमंत्री अपनी लोकप्रियता के लिए जाने जाते हैं, वहीं हिमाचल के मौजूदा मुख्यमंत्री ‘लोकप्रिय’ कम और ‘लोन प्रिय’ ज्यादा हो गए हैं।” जयराम ने आरोप लगाया कि 2022 में जब उन्होंने सत्ता छोड़ी थी, तब प्रदेश पर कुल कर्ज करीब 69 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है।

विकास कार्यों और आर्थिक अनुशासन पर जुबानी जंग तेज

कर्ज के इस सियासी दंगल में विकास कार्यों का मुद्दा भी गरमाया रहा। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के समय लिए गए कर्ज से जमीनी स्तर पर शानदार सड़कें, पुल और अस्पताल बने तथा युवाओं को रोजगार मिला, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सड़कों की हालत खस्ता हो चुकी है और विकास के सारे पहिये थम चुके हैं।

 

 

इसके विपरीत, मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि उनकी सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ कड़े और कठिन फैसले लिए हैं। शराब ठेकों की नीलामी से सरकार ने शुरुआती तौर पर ही 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय जुटाई है, जो आने वाले पांच वर्षों में बढ़कर 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। बहरहाल, 400 करोड़ के नए कर्ज की आहट और आंकड़ों की इस राजनीतिक जंग ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को और अधिक घेरने की पूरी तैयारी में है।

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