इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एफआईए ने नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू से ‘आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना 5.0’ के तहत पात्र एयरलाइंस को स्वीकृत ऋण सहायता की लंबित राशि जल्द जारी कराने में मदद का अनुरोध किया है. भारतीय एयरलाइंस महासंघ ने एक अक्टूबर को लिखे पत्र में ईसीएलजीएस 5.0 योजना के तहत ऋण सहायता लेने की इच्छुक पात्र एयरलाइंस को राशि जल्द जारी कराने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. पत्र में कहा गया कि ईसीएलजीएस 5.0 के तहत ऋण के लिए आवेदन करने वाली एयरलाइंस को योजना के तहत मंजूर सहायता का एक हिस्सा मिल चुका है, लेकिन ऋण देने वाले संस्थानों की लगातार हिचकिचाहट के कारण बाकी राशि जारी करने में देरी हुई है.

कितना पैसा मिलना बाकी
एफआईए ने कहा कि योजना के तहत राशि समय पर जारी कराने में मंत्रालय की मदद जरूरी है, खासकर उन सदस्य एयरलाइंस के लिए जो अब भी वित्तीय रूप से कमजोर हैं और योजना के तहत तत्काल नकदी सहायता के लिए आवेदन कर चुकी हैं. सूत्रों ने कहा कि कई चुनौतियों का सामना कर रही स्पाइसजेट को इस योजना के तहत अब तक 150 करोड़ रुपए मिल चुके हैं और वह 350 करोड़ रुपए की अगली किस्त का इंतजार कर रही है.
मार्च में सरकार द्वारा मंजूर और राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा लागू की जा रही ईसीएलजीएस 5.0 का मकसद बाहरी व्यवधानों से प्रभावित कारोबार को लक्षित ऋण गारंटी सहायता देना है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह योजना मार्च, 2027 तक या 2.55 लाख करोड़ रुपए की गारंटी जारी होने तक, इनमें से जो पहले हो, लागू रहेगी. इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों , पात्र गैरएमएसएमई कारोबारी ऋणकर्ताओं और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस को शामिल किया गया है.
क्या है ये स्कीम
इन लोन की अवधि सात साल की है, जिसमें रीपेमेंट पर दो साल का मोरेटोरियम शामिल है, और गारंटी कवर पूरी अवधि के लिए लागू रहता है. सिर्फ वे एयरलाइन ही इसके लिए योग्य हैं जिनके पास 31 मार्च, 2026 तक बकाया क्रेडिट सुविधाएं हैं और जिनके अकाउंट ‘स्टैंडर्ड’ कैटेगरी में हैं. लोन 31 मार्च, 2027 तक मंजूर हो जाने चाहिए.
यह स्कीम ओरिजिनल ECLGS मॉडल को फिर से शुरू करती है, जिसे कोविड19 महामारी के दौरान MSME को सरकारी गारंटी वाला और बिना किसी गिरवी के क्रेडिट देने के लिए लॉन्च किया गया था. पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से, भारतीय एयरलाइंस को ईंधन की ज़्यादा लागत, बंद एयरस्पेस और लंबे उड़ान रूट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण उन्हें कई इंटरनेशनल ऑपरेशन में कटौती करनी पड़ी है.



