टाइगर श्रॉफ पर गोली चलाने वाले 3 शूटरों की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई पुलिस की अगली चुनौती लॉरेंस और अनमोल बिश्नोई को कस्टडी में लेने की है. दोनों को कस्टडी में लेने के लिए मुंबई पुलिस को केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति जरूरी है. लॉरेंस इस वक्त गुजरात के साबरमती जेल में बंद है. वहीं अनमोल को दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद करके रखा गया है. दोनों के बाहर ले जाने पर सख्त पाबंदी लागू है.

केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक लॉरेंस की तरह अनमोल पर भी बीएनएसएस की धारा 303 के तहत प्रतिबंध है. इसके कारण किसी दूसरे राज्य की पुलिस अनमोल और लॉरेंस से पूछताछ तो कर सकती हौ, लेकिन उसे कस्टडी में बाहर नहीं ले जा सकती है.
अनमोललॉरेंस को कस्टडी में लेना क्यों जरूरी?
लॉरेंस गैंग लगातार मुंबई में पैर पसारने की कवायद में जुची है. इसी कड़ी में गैंग से जुड़े तीन शूटरों ने रविवार को टाइगर पर गोली चला दी. हालांकि, टाइगर इस हमले में बालबाल बच गए.
दूसरी तरफ अनमोल बिश्नोई बाबा सिद्दीकी की हत्या और सलमान के घर के बाहर फायरिंग कराने के मामले में मुख्य आरोपी है. उसे बाहर से पकड़कर दिल्ली तो लाया जा चुका है, लेकिन मुंबई पुलिस को उसकी कस्टडी नहीं मिली है.
मुंबई पुलिस अनमोल को कस्टडी में लेकर गैंग के क्रियाकलापों की तह तक जाना चाहती है. 2023 में एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक लॉरेंस गैंग में करीब 700 शूटर हैं. अधिकांश पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं.
BNSS की धारा 303 और 304 क्या हैं?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता , 2023 की धारा 303 के तहत केंद्र या राज्य सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी कैदी को जेल से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगा सके. ऐसा कानूनव्यवस्था बनाए रखने और कैदी को जेल से बाहर ले जाने से पैदा होने वाली संभावित समस्याओं को रोकने के लिए किया जा सकता है.
अमूमन पहले कैदियों को पेशी के लिए अदालत ले जाने के दौरान गोलीबारी की कई घटनाएं सामने आती रही हैं. इसे रोकने के उद्देश्य से यह कानून लाया गया है.
वहीं, BNSS की धारा 304 जेल में बंद कैदियों को अदालत में पेश करने से संबंधित है. इसके तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में जेल अधिकारी अदालत के आदेश पर अमल करने से इनकार कर सकता है. हालांकि, इसके लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी है.
1. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यदि कैदी बीमारी या शारीरिक कमजोरी के कारण जेल से बाहर ले जाने के लिए अनुपयुक्त है, तो जेल अधिकारी संबंधित प्रावधान का इस्तेमाल कर सकता है.
2. यदि कैदी को जेल से बाहर ले जाने से किसी लंबित मुकदमे या जांच पर असर पड़ने की आशंका हो, तो कानून में निर्धारित शर्तों के तहत इस पर विचार किया जा सकता है.
3. यदि कैदी को जेल से 25 किलोमीटर से अधिक दूर ले जाना हो, तो संबंधित कानूनी प्रावधान लागू हो सकता है. हालांकि, दूरी संबंधी इस शर्त को धारा 304 के मूल पाठ से मिलाकर देखना जरूरी है.



