Karnataka Yadgir news: कर्नाटक के यदगिरि जिले में एक काली भैंस ने सफेद रंग के पाड़ा को जन्म दिया है. भैंस के बच्चे को देखकर किसान और आसपास के गांवों के लोग हैरान हैं. भैंस के बच्चे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग किसान के घर पहुंच रहे हैं. यह मामला कर्नाटक के यदगिरि जिले के हुनसगी तालुका के नारायणपुर गांव का है.

हुनसगी तालुका के रहने वाले किसान परशुराम की काली भैंस ने एक सफेद रंग के पाड़ा को जन्म दिया है. बताया जा रहा है कि भैंस करीब 10 महीने से गर्भवती थी. गर्भावस्था पूरी होने के बाद उसने इस अनोखे रंग के बच्चे को जन्म दिया. किसान के मुताबिक, भैंस का बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है.
क्या हो सकती है इसकी वजह?
मातापिता से मिले जीन में अंतर:बच्चे का रंग मातापिता से मिलने वाले जीन पर निर्भर करता है. कभीकभी मातापिता के रंग से अलग रंग भी बच्चे में दिखाई दे सकता है. भैंस काली होने के बावजूद उसके जीन में रंग से जुड़े अलग गुण मौजूद हो सकते हैं.
रंग बनाने वाले पिगमेंट में अंतर:त्वचा और बालों का रंग मेलेनिन जैसे पिगमेंट से प्रभावित होता है. अगर किसी आनुवंशिक बदलाव के कारण पिगमेंट कम बने या बालों में रंग न आए, तो बच्चा बहुत हल्का या सफेद दिखाई दे सकता है.
दुर्लभ आनुवंशिक बदलाव:कभीकभी जीन में दुर्लभ बदलाव के कारण भी जानवर के शरीर का रंग सामान्य से अलग हो सकता है. हालांकि, यह पाड़ा अल्बिनिज्म या किसी अन्य खास आनुवंशिक स्थिति से प्रभावित है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती.
भैंसों में काला रंग आम है, लेकिन जानवरों के रंग में आनुवंशिक विविधता संभव है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सफेद रंग का बच्चा पैदा होना अपने आप में किसी बीमारी का प्रमाण नहीं है. यह जानने के लिए कि पाड़े का रंग प्राकृतिक आनुवंशिक विविधता के कारण है या किसी खास स्थिति की वजह से, पशु चिकित्सक उसकी त्वचा, आंखों, बालों और स्वास्थ्य की जांच कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर आनुवंशिक जांच भी की जा सकती है.



