किसी तरह के चैलेंज की बात होती है, तो यह लाइन खूब कही जाती है कि कौन बीड़ा उठाएगा? अब आपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि ये बीड़ा क्या होता है और इसका चैलेंज से क्या मतलब है. दरअसल जब पान के पत्ते में कत्था और सुपारी लगाकर बांध दिया जाता है तो बुंदेली भाषा में उसे बीड़ा कहा जाता है. अब दूसरा सवाल चैलेंज से कनेक्शन का है तो, यह कहानी करीब 800 साल पुरानी है.

दरअसल, उन दिनों दिल्ली में पृथ्वीराज चौहान का शासन था, वहीं बुंदेलखंड में राजा परमाल शासन करते थे. उन दिनों राजाओं का आपस में टकराव होता रहता था. एक बार राजा परमाल के दरबार में किसी टारगेट को लेकर थाल में बीड़ा रखा गया और चैलेंज किया गया कि जो इस टारगेट को हासिल कर सकता है, वो बीड़ा उठाए. उस समय आल्हा ऊदल ने बीड़ा उठाया और टारगेट हासिल किया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। तब से बीड़ा उठाने की परंपरा शुरू हो गई.

दुश्मनी भी खत्म करता है बीड़ा

बुंदेलखंड खासतौर पर छतरपुर में बीड़ा का इस्तेमाल दुश्मनी खत्म करने के लिए भी की जाती है. परंपरा है कि रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खिलाकर पुरानी से पुरानी दुश्मनी को खत्म किया जा सकता है. आज भी यहां रावण दहन के बाद लोग एक दूसरे को पान खिलाकर पुराने गिलेशिकवे भुलाते हैं, और दोस्ती का नया रिश्ता कायम करते हैं. यहां रावण दहन के साथ शुरू होने वाली परंपरा दिवाली तक चलती है. लोग सड़कों, घरो, चौराहों, गलियों और मोहल्लों में एक दूसरे को बीड़ा खिलाते नजर आते हैं.

बहुतायत से होती है पानी की खेती

स्थानीय जानकार सुरेन्द्र चौरसिया के मुताबिक बुंदेलखंड के महाराजपुर, गढ़ी मलहरा और यूपी के महोबा आदि जिलों में पान की खेती बहुतायत से होती है. यहां का पान दुनिया भर में मशहूर था. लंबे समय से यहां से पान विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाता रहा है. वहीं बुंदेलखंड के जिलों में पान बड़े शौक के साथ खाया और खिलाया भी जाता है.