पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की प्रतिक्रिया इस समय सुर्खियों में है. मंत्री ओमप्रकाश ने दिव्या मित्तल पर तंज कसते हुए कहा था कि आईएएस बनना आसान है, लेकिन नेता नहीं. उनकी इस प्रतिक्रिया पर बहस शुरू हो गई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कई आईएएस और आईपीएस नौकरी छोड़कर नेता बने, लेकिन क्या कभी कोई नेता आईएएस बन पाया?

लोग ओमप्रकाश राजभर को सलाह भी दे रहे हैं कि जब आईएएस बनना इतना आसान है तो वह सबसे पहले अपने दोनों बेटों को अफसर बनाकर दिखाएं. ओमप्रकाश राजभर के बयान पर इसी तरह के और भी कई सवाल पूछे जा रहे हैं. खासतौर पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों ने उनकी प्रतिक्रिया को मुद्दा बनाने की कोशिश की है. हालांकि इस बात पर अभी तक ओमप्रकाश राजभर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

नेता के अफसर बनने का कोई रिकॉर्ड नहीं

जानकारों के मुताबिक आजादी के बाद देश के इतिहास में अब तक कोई ऐसा रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, जिसमें कोई नेता अपनी नेतागिरी छोड़कर सिविल सर्विस की पढ़ाई की हो या सिविल सर्विस में चयनित हुआ हो. जबकि देश में दर्जनों ऐसे उदाहरण उपलब्ध हैं, जिसमें अफसरों ने नौकरी छोड़कर राजनीति की राह पकड़ी. इनमें से ज्यादातर सफल भी हुए. हालांकि कुछेक अधिकारियों ने बाद में राजनीति भी छोड़ दी.

ये अफसर बने नेता

पीएल पुनिया: यूपी कैडर के पूर्व वरिष्ठ आईएएस, नौकरी के बाद कांग्रेस के ध्वज तले राजनीति की. पहले लोकसभा पहुंचे, बाद में राज्यसभा सदस्य भी बने.

आलोक रंजन: पूर्व आईएएस आलोक रंजन यूपी के मुख्य सचिव रहे. रिटायरमेंट के बाद सपा के बैनर तले राजनीति शुरू की. राज्यसभा के पिछले चुनावों में वह सपा के उम्मीदवार भी थे.

असीम अरुण: IPS थे, 2022 में वीआरएस लेकर बीजेपी में शामिल हुए और कन्नौज सदर से जीत कर विधानसभा पहुंचे. आज वह उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण मंत्री हैं.

चंद्रपाल: पूर्व आईएएस चंद्रपाल ने नौकरी के बाद राजनीति की राह पकड़ी. उन्होंने आदर्श समाज पार्टी बनाई थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली.

राम बहादुर: पूर्व आईएएस, 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े, 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी जॉइन की.

विजय शंकर पांडे: पूर्व आईएएस विजय शंकर पांडेय ने नौकरी के बाद राजनीति में दम दिखाया. लोक गठबंधन पार्टी बनाकर 2019 के लोकसभा चुनावों में वह फैजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़े, लेकिन सफल नहीं हो सके.

अमिताभ ठाकुर: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को सरकार ने जबरन रिटायर किया था. इसके बाद उन्होंने 2021 में आजाद अधिकार सेना नाम से पार्टी बनाई है.

एसआर दारापुरी: पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी ने भी रिटायरमेंट के बाद राजनीति शुरू की. ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के बैनर तले राजनीति में आए.

सुलखान सिंह: 1980 बैच के आईपीएस एवं पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने भी राजनीति शुरू की है. नवंबर 2023 में उन्होंने बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी का गठन किया. उनकी राजनीति का केंद्र UP और MP के 15 जिलों को मिलाकर अलग बुंदेलखंड राज्य बनाना है.

ब्रजलाल: पूर्व आईपीएस एवं पूर्व डीजीपी ब्रजलाल भी रिटायरमेंट के बाद राजनीति में हैं. 2015 में उन्होंने बीजेपी जॉइन किया और फिर 2018 में वह एससीएसटी आयोग का अध्यक्ष बने. फिलहाल वह बीजेपी की ओर से राज्यसभा में हैं.