PLB Bonus Update: त्योहारी सीजन शुरू होते ही केंद्रीय कर्मचारियों को अपने सालाना बोनस का इंतजार रहता है. ग्रुप बी तथा सी के नॉनगजटेड कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस को लेकर सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है. कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दशहरे से पहले बोनस जारी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है. सबसे बड़ा मुद्दा सिर्फ तारीख का नहीं है, बल्कि बोनस की रकम का भी है. कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार बोनस तय करने की पुरानी लिमिट को तुरंत बदले.

अक्टूबर के पहले हफ्ते में आ सकता है पैसा
बोनस के भुगतान को लेकर 25 सितंबर को पोस्टल कर्मचारियों की संयुक्त परिषद ने डाक विभाग के सचिव को चिट्ठी लिखी है. इसमें मांग की गई है कि 21 अक्टूबर को होने वाली दुर्गा पूजा से पहले बोनस का पैसा खाते में डाल दिया जाए. आम तौर पर सरकार हर साल दशहरे से पहले पीएलबी जारी करती है. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है. ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में बोनस का ऐलान हो सकता है. भारत पेंशनर्स समाज के महासचिव अविनाश राजपूत ने भी दशहरे से पहले पैसा मिलने की पूरी उम्मीद जताई है.
बोनस लिमिट बढ़ाने की तगड़ी मांग
वर्तमान में सरकार 7,000 रुपये की मासिक सीमा पर बोनस की गणना करती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। नेशनल काउंसिल फॉर ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी समेत कई संगठन इसे बढ़ाकर 21,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं. एनसीजेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र में साफ कहा है कि जब सरकार ने खुद न्यूनतम मजदूरी 21,000 रुपये तय की है, तो बोनस की सीमा इससे कम बिल्कुल नहीं होनी चाहिए. श्रम मंत्रालय के एक नोटिफिकेशन के मुताबिक अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन करीब 21,000 रुपये बैठता है.
खाते में कितनी रकम आएगी
मौजूदा समय में 7,000 रुपये के आधार पर 30.4 दिनों का औसत निकाला जाता है. इस हिसाब से कर्मचारियों को 6,908 रुपये का बोनस मिलता है. कर्मचारियों का कहना है कि आज के महंगाई वाले समय में किसी भी शहर में रहने वाले के लिए 6,908 रुपये बहुत छोटी रकम है. अगर सरकार कर्मचारी संगठनों की मांग मानकर लिमिट को 21,000 रुपये कर देती है, तो कर्मचारियों को लगभग 20,724 रुपये का बोनस मिलेगा.
आयुध कारखानों के कर्मचारी कर रहे विरोध
बोनस के मुद्दे पर 30 सितंबर को एआईडीईएफ की तरफ से कड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. ये प्रदर्शन सरकार के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें चार आयुध कारखानों के कर्मचारियों को 30 दिन की जगह 18.56 दिन के हिसाब से बोनस देने की बात कही गई है. इनमें शाहजहांपुर, कानपुर, अवादी तथा हजरतपुर की फैक्ट्रियां शामिल हैं. संगठन की सख्त मांग है कि इन कर्मचारियों को भी पूरे 30 दिन के हिसाब से 21,000 रुपये की सीमा पर बोनस दिया जाए.

