Shimla News: यूनेस्को विश्व धरोहर कालकाशिमला रेलवे ट्रैक की प्राकृतिक खूबसूरती को प्रदूषण से बचाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत 122 साल पुराने इस नैरोगेज रेल सेक्शन पर जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जाएगी. रेल मंत्रालय की विशेष टीम ने हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन और बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास हाइड्रोजन फ्यूल प्लांट स्थापित करने के लिए ज़मीनी सर्वे का कार्य लगभग पूरा कर लिया है. सर्वे रिपोर्ट पर अंतिम मंथन के बाद रेल मंत्रालय ट्रायल की अनुमति जारी करेगा.

प्रदूषणमुक्त यात्रा के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. ये ट्रेन डीजल के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल की अत्याधुनिक तकनीक से चलेगी, जिससे हानिकारक धुएं के बजाय केवल पानी की भाप निकलेगी. धुएं और कार्बन उत्सर्जन के खात्मे से ट्रैक के आसपास फैले घने जंगलों और हरेभरे पेड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ट्रेन को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति देने के लिए बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास हाइड्रोजन फ्यूल प्लांट बनाने का प्रस्ताव है, जिसके लिए जमीन का चयन भी कर लिया गया है.
35 हाइड्रोजन ट्रेनों में कालकाशिमला शामिल, नैरोगेज पर होगी पहली ट्रेन
रेल मंत्रालय ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत देश की 35 हेरिटेज रेल लाइनों पर यह आधुनिक ट्रेन चलाने की योजना बनाई है. जींद से सोनीपत के बीच ब्रॉडगेज सेक्शन में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जा रही है. कालकाशिमला ट्रैक पर मंजूरी मिलने के साथ ही यह देश में नैरोगेज रेल लाइन की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बन जाएगी. केंद्र सरकार ने वर्ष 202425 के दौरान हेरिटेज रेल लाइनों के आधुनिकीकरण के लिए इस परियोजना को शामिल किया था, जिसके बाद से रेलवे बोर्ड लगातार सर्वे करवा रहा था.
122 साल पुराना इतिहास: कोयले से लेकर हाइड्रोजन तक का सफर
कालकाशिमला रेलवे ट्रैक का अपना एक समृद्ध और ऐतिहासिक अतीत रहा है. 122 वर्ष पुराने इस ट्रैक पर 103 सुरंगे, 800 से अधिक पुल और करीब 900 तीखे मोड़ हैं. इस ट्रैक पर सबसे पहले कोयले से चलने वाले स्टीम इंजन चलते थे, जिसके बाद डीजल लोकोमोटिव आए. अब इस ट्रैक को आधुनिक ट्रेनसेट और नए कोचों से सुसज्जित किया जा रहा है. कालकाशिमला रेलवे समिति के सदस्य सुभाष वर्मा के अनुसार, आधुनिक सुविधाओं और हाइड्रोजन ट्रेन के चलने से देशविदेश से आने वाले पर्यटकों का सफर और भी शानदार व प्रदूषणमुक्त हो जाएगा.


