ITBP के DG शत्रुजीत कपूर का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में चीन और भारत के सैनिक आमनेसामने आ गए थे. कई जगह टकराव की स्थिति भी बनी, जो अभी भी जारी है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है. दोनों देशों के बीच बातचीत भी लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब तक पूरी सीमा पर अंतिम समझौता नहीं हो पाया है. अगस्त 2026 में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक हुई. इसमें सीमा तय करने की बातचीत आगे बढ़ाने, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने और सैन्य अधिकारियों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति बनी.

इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीमा आखिर कहां तय होगी और दोनों देश अंतिम समझौते तक कब पहुंचेंगे? इस विवाद को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि दोनों देश किन इलाकों पर दावा करते हैं, 21 साल में बातचीत कहां तक पहुंची और हालिया सहमति से जमीन पर क्या बदल सकता है.
चीन के कब्जे में कितनी जमीन, किन इलाकों पर दावा?
विदेश मंत्रालय ने 8 दिसंबर 2011 को राज्यसभा में बताया था कि जम्मूकश्मीर में भारत की करीब 38,000 वर्ग किमी जमीन पर चीन का कब्जा है. इसके अलावा, 2 मार्च 1963 को चीन और पाकिस्तान के बीच हुए सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की भारतीय जमीन का करीब 5,180 वर्ग किमी हिस्सा चीन को सौंप दिया था. भारत सरकार ने इस हस्तांतरण को अवैध बताया था. सीमा के पूर्वी हिस्से में चीन अरुणाचल प्रदेश की करीब 90,000 वर्ग किमी जमीन पर दावा करता है.
2003 में शुरू हुई विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत
भारत और चीन ने 2003 में सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि नियुक्त करने पर सहमति जताई. इनका काम सीमा समझौते का ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करना था, जिस पर दोनों देश सहमत हो सकें. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। शुरुआती पांच बैठकों के बाद 11 अप्रैल 2005 को दोनों देशों ने भारतचीन सीमा विवाद के समाधान के लिए राजनीतिक मानकों और मार्गदर्शक सिद्धांतों से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसका उद्देश्य एक निष्पक्ष, उचित और दोनों देशों को स्वीकार्य समाधान की दिशा तय करना था. अगस्त 2026 तक विशेष प्रतिनिधियों की 25 बैठकें हो चुकी थीं. लेकिन तक पूरी सीमा के लिए ऐसा अंतिम समझौता नहीं हुआ है, जिससे विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाए.
25वीं बैठक में क्या तय हुआ? आठ बिंदुओं पर बनी सहमति
25 अगस्त 2026 को बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 25वें दौर की बातचीत की. 26 अगस्त को जारी संयुक्त सहमति में आठ प्रमुख बातें शामिल थीं.
1. सीमा पर शांति बनाए रखना
दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने और संबंधों को स्थिर बनाने के लिए काम जारी रखने की बात कही.
2. सीमा तय करने की बातचीत आगे बढ़ाना
2005 के समझौते के आधार पर दोनों देशों को ऐसा समाधान तलाशना है, जो निष्पक्ष हो और जिसे दोनों स्वीकार कर सकें.
3. दो कार्य समूहों की भूमिका बढ़ाना
सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन से जुड़े समूह बातचीत को आगे बढ़ाएंगे. पहले उन्हें अपने काम की शर्तें और दायरा तय करना होगा.
4. विवाद होने पर तुरंत बातचीत
जमीन पर किसी स्थिति या विवाद को कूटनीतिक बातचीत, सैन्य अधिकारियों और मौजूदा संपर्क व्यवस्थाओं के जरिए सुलझाने की कोशिश होगी.
5. दो नई हॉटलाइन और दो बैठक स्थल
पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में सैन्य हॉटलाइन के दो अतिरिक्त संपर्क माध्यम और सीनियर सैन्य कमांडरों की बैठकों के लिए दो अतिरिक्त जगहें तय की गईं.
6. सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा
दोनों देशों ने तीन तय सीमा व्यापार केंद्रों को फिर खोलने का स्वागत किया. कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीय यात्रियों के जत्थों की संख्या बढ़ाने और सीमा पार सहयोग मजबूत करने पर भी जोर दिया गया.
7. नदियों के आंकड़ों पर बातचीत
सितंबर में सीमा पार बहने वाली नदियों पर एक्सपर्ट ग्रुप की बैठक होगी. इसमें पानी के बहाव और जलस्तर से जुड़े आंकड़े साझा करने तथा पुराने समझौतों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी.
8. अगली बैठक 2027 में भारत में
दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधियों की 26वीं बैठक 2027 में भारत में करने पर सहमति जताई.
2020 के गलवान संघर्ष के बाद रिश्तों में क्या बदला?
भारत और चीन के रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प थी. इसके बाद सीमा पर भरोसा घटा और दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा. भारत ने चीनी निवेश पर पाबंदियां लगाईं, TikTok समेत कई चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाया और चीन के साथ सीधी उड़ानें रोक दी थीं.
अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी यानी डिसइंगेजमेंट को लेकर सहमति बनी. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी मुलाकात की. 2025 में सीधी उड़ानें फिर शुरू हुईं और PM मोदी चीन में SCO समिट में शामिल हुए. इन कदमों से दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिशों को आगे बढ़ाने में मदद मिली.
इसके बावजूद सीमा विवाद खत्म नहीं हुआ है. दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी अहम बने हुए हैं. 2025 में भारतचीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 155.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो पिछले साल से 12% से ज्यादा था. यानी सीमा पर तनाव के बावजूद दोनों देशों के आर्थिक संबंध बढ़ते रहे.
बातचीत से क्या बदल सकता है और सबसे बड़ी अड़चन क्या है?
सीमा निर्धारण की बातचीत आगे बढ़ती है, तो इससे विवादित इलाकों को लेकर दोनों देशों की स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है. नए हॉटलाइन संपर्क माध्यम और सैन्य बैठक स्थल किसी तनावपूर्ण स्थिति में तुरंत बातचीत करने में मदद कर सकते हैं. इससे गलतफहमी के कारण होने वाले टकराव का खतरा घट सकता है.
लेकिन सीमा पर शांति बनाए रखना और सीमा विवाद का अंतिम समाधान निकालना दो अलग बातें हैं. अभी दोनों देशों ने बातचीत आगे बढ़ाने और सीमा प्रबंधन सुधारने पर सहमति जताई है. उन्होंने यह नहीं बताया कि किस इलाके की सीमा पहले तय होगी, जमीन पर कौनसे बदलाव किए जाएंगे और अंतिम समझौते की समयसीमा क्या होगी. एक्सपर्ट ग्रुप्स को पहले अपने काम का दायरा तय करना है. इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सीमा निर्धारण की प्रक्रिया में कितनी ठोस प्रगति होती है. 2027 में होने वाली 26वीं बैठक अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी.
यानी 21 साल में 25 बैठकें होने के बाद भारत और चीन ने सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए संपर्क व्यवस्थाएं बढ़ाने और सीमा निर्धारण की बातचीत आगे ले जाने पर सहमति जताई है. लेकिन विवादित जमीन का अंतिम फैसला अभी बाकी है.


