अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर राष्ट्रपति की शक्ति सीमित करने वाला प्रस्ताव 4950 वोटों से गिर गया।

अमेरिकी सीनेट में गुरुवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर राष्ट्रपति की ताकत सीमित करने वाला एक अहम प्रस्ताव गिर गया। वोटिंग में यह प्रस्ताव 4950 के बेहद करीबी अंतर से खारिज हो गया।
पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैकॉर्मिक इस वोटिंग में शामिल नहीं हुए। अगर वह वोट करते तो नतीजा बदल भी सकता था।
क्या था इस प्रस्ताव में?
इस प्रस्ताव का मकसद यह था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ कोई भी नया हमला शुरू करने से पहले अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लें। प्रस्ताव पास हो जाता तो राष्ट्रपति अकेले युद्ध का फैसला नहीं ले पाते। प्रस्ताव अभी सीनेट की विदेश मामलों की समिति में अटका हुआ है।
इसे लाने वाले सांसद चाहते थे कि इसे सीधे पूरे सीनेट में चर्चा और वोटिंग के लाया जाए। लेकिन वोट कम पड़ने की वजह से अब सांसदों को इसे आगे बढ़ाने के लिए दोबारा कोशिश करनी होगी।
ट्रंप के हमलों के बाद बढ़ी थी मांग
पिछले हफ्तों में राष्ट्रपति ट्र्ंप द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसद और कुछ रिपब्लिकन सांसद लगातार मांग कर रहे थे कि युद्ध जैसे बड़े फैसले संसद की मंजूरी से ही हों। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उनका तर्क है कि संविधान के मुताबिक युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास हैं, राष्ट्रपति के पास नहीं है।
लेकिन गुरुवार की वोटिंग में रिपब्लिकन बहुमत ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। उनका कहना है कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में राष्ट्रपति को तेजी से फैसला लेने की आजादी मिलनी चाहिए।
ईरान ने दी अमेरिका को चेतावनी
इस बीच ईरान से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि केश्म आईलैंड पर हुई अमेरिकी बमबारी में नागरिकों की मौत के लिए पूरी तरह से अमेरिका जिम्मेदार है। गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी।
उन्होंने कहा कि नागरिक ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। केश्म आईलैंड पर हुए हमले में कितने लोग मारे गए, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन ईरानी मीडिया ने इसमें कई आम नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है।



