
Human evolution on Mars: इंसान हमेशा से धरती के बाहर दूसरी दुनिया बसाने का सपना देखता आया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर इंसान मंगल ग्रह पर रहने लगे तो वो कैसे दिखेगा, उसके शरीर में क्या बदलाव आएगा? दुनिया के सबसे अमीर इंसान और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क से लेकर नासा तक दुनिया की बड़ी एजेंसियां लाल ग्रह यानी मंगल पर मानव लोगों को बसाने का सपना देख रही हैं लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चेतावनी दी है जो किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है.
क्या मंगल पर रहने के लिए हमारा शरीर वाकई तैयार है? हाल ही में आई एक नई किताब Becoming Martian में स्कॉट सोलोमन ने हैरान कर देने वाला दावा कर दिया है. उनका मानना है कि मंगल ग्रह पर बसना न सिर्फ पानी और हवा के लिए चुनौती है बल्कि यह मानव शरीर को हमेशा के लिए बदल सकता है.
बदल जाएगी शरीर की बनावट
अमेरिका के राइस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सोलोमन के मुताबिक हमारा शरीर लाखों सालों से पृथ्वी के वातावरण, गुरुत्वाकर्षण और रेडिएशन के हिसाब से पूरी तरह से ढल चुका है. मंगल पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में बहुत कम है, वहां पृथ्वी की तुलना में सिर्फ 38 प्रतिशत ही गुरुत्वाकर्षण है. कम गुरुत्वाकर्षण की वजह से मंगल पर पैदा होने वाले बच्चों की हड्डियां बहुत कमजोर हो सकती हैं और उनकी मांसपेशियों का विकास अलग तरह से होगा. सोलोमन का यह भी तर्क है कि संसाधनों की कमी की वजह से भविष्य के मार्शियन यानी मंगल पर रहने वाले कद में छोटे हो सकते हैं, जिससे उन्हें कम भोजन और पानी की जरूरत पड़े.
बड़े सिर और बदला हुआ रंग
सबसे चौंकाने वाला दावा प्रसव यानी चाइल्डबर्थ को लेकर हुआ है. कमजोर हड्डियों की वजह से मंगल पर प्राकृतिक जन्म जोखिम भरा होगा, जिससे सिजेरियन अनिवार्य हो सकता है. सोलोमन के मुताबिक अगर जन्म के लिए बर्थ कैनाल की जरूरत नहीं रही तो इंसानी सिर का आकार बढ़ने की कोई सीमा नहीं रहेगी. भविष्य के इंसानों के सिर आज की तुलना में बहुत ही ज्यादा बड़े हो सकते हैं. सिर्फ यही नहीं मंगल पर खतरनाक रेडिएशन से बचने के लिए इंसानी त्वचा का रंग भी बदल सकता है. शरीर में नया मेलेनिन तैयार हो सकता है, जिससे इंसानों का रंग गहरा या पूरी तरह अलग हो सकता है.
धरती पर रहना होगा मुश्किल
ऐसे में अब लोगों के मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि क्या अंतरिक्ष में प्रजनन संभव है? सोलोमन के मुताबिक यह सबसे बड़ा सवाल है जिसका जवाब हमारे पास नहीं है. कम गुरुत्वाकर्षण में शिशु का विकास कैसे होगा यह अभी पूरी तरह से रहस्य बना हुआ है. इसके साथ ही पृथ्वी से दूर रहने वाले इंसानों का इम्यून सिस्टम बहुत ही कमजोर हो जाएगा. मंगल पर पैदा होने वाले बच्चों का पृथ्वी के सामान्य बैक्टीरिया और वायरस से बचना मुश्किल हो जाएगा. उनके लिए धरती पर वापस आना हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
क्या हम तैयार हैं?
एलन मस्क जैसे अरबपति और नासा भले ही अगले कुछ सालों में मंगल पर शहर बसाने की बात कर रहे हों लेकिन वैज्ञानिक सोलोमन ने यह चेतावनी दी है कि हम अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक इंसान मंगल पर जीवित तो रह सकता है लेकिन वह वैसा इंसान नहीं होगा जैसा हम आज धरती पर हैं.





