
न्यूयॉर्क: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में उस प्रस्ताव को स्पॉन्सर किया है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और जॉर्डन पर ईरान द्वारा किए गए भयानक हमलों की कड़ी निंदा की गई है। इस प्रस्ताव में ईरान से सभी हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की उसकी धमकियों की आलोचना की गई है।
मतदान और प्रस्ताव का समर्थन
15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने बुधवार को इस प्रस्ताव को अपनाया। इसके पक्ष में 13 वोट पड़े और विरोध में शून्य। वीटो शक्ति वाले स्थायी सदस्य चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनाए रखी। वर्तमान में UNSC की अध्यक्षता अमेरिका के पास है। सह-प्रायोजक देश: बहरीन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव का कुल 135 देशों ने सह-प्रायोजन किया। इनमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे कई प्रमुख देश शामिल हैं। इन देशों ने यूएन में खुलकर ईरान की ‘दादागिरी’ के खिलाफ आवाज उठाई है।
संप्रभुता का समर्थन
प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता का पुरजोर समर्थन किया गया है। इन देशों पर ईरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया गया है।
ईरान से मांग की गई है कि वह GCC देशों और जॉर्डन के खिलाफ अपने हमले तुरंत बंद करे और प्रॉक्सी (छद्म गुटों) के इस्तेमाल सहित सभी उकसावे वाली कार्रवाइयों को बिना किसी शर्त के रोके। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन अधिकारों का सम्मान करने पर जोर दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या बाब अल-मंडेब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाली ईरान की किसी भी धमकी या कार्रवाई की निंदा की गई है। रिहायशी इलाकों और नागरिक संपत्तियों पर हुए हमलों, और उसके परिणामस्वरूप हुई नागरिकों की मौत की भी निंदा की गई। ईरान से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया गया है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इस प्रस्ताव के पारित होने को ईरान की क्रूरता के खिलाफ खाड़ी देशों का स्पष्ट और कड़ा संदेश बताया। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है, जो निंदनीय है। वाल्ट्ज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप और उनकी टीम ने कूटनीतिक बातचीत के हर संभव प्रयास किए और शांति चाही। लेकिन ईरान ने केवल मिसाइलें, ड्रोन और परमाणु हथियारों का रास्ता चुना। वाल्ट्ज ने चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यहां अपनी ‘रेड लाइन’ खींच दी है। ईरान ने इसे एक बार फिर पार किया है, और अब उसे दुनिया के सामने परिणामों का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान का पलटवार और बचाव
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अमीर सईद इरावनी ने सुरक्षा परिषद की इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण, गैरकानूनी और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि गलतफहमी में न रहें: आज यह ईरान है; कल कोई भी अन्य संप्रभु देश हो सकता है। इरावनी ने दावा किया कि 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों में भारी तबाही हुई है। उनके अनुसार 1348 से अधिक नागरिक मारे गए हैं (जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं)। 17,000 से अधिक नागरिक घायल हुए हैं।
19734 नागरिक स्थलों (जिसमें 16,191 घर, अस्पताल, स्कूल और ऊर्जा ढांचा शामिल है) को नष्ट या क्षतिग्रस्त किया गया है। उन्होंने इन हमलों को युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया। ईरानी दूत ने कहा कि उनके रक्षात्मक अभियान केवल क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, न कि क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता को। उन्होंने इसका ठीकरा इज़राइल पर फोड़ते हुए कहा कि इज़राइल ने अमेरिका को एक क्षेत्रीय संघर्ष में खींच लिया है।
पड़ोसियों से संबंध
उन्होंने कहा कि तनाव कम होने के बाद ईरान और उसके पड़ोसी देश सहयोग और आपसी सम्मान के अपने पारंपरिक रिश्तों पर लौट आएंगे। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से असत्य बताया और नेविगेशन की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात कही।




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