Thursday, February 12, 2026
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महीनों खुदाईˈ करते हैं ये लोग, फिर चाटने लगते हैं पत्थर, थूक से सुलझाते हैं सैंकड़ों साल पुराना राजˌ

महीनों खुदाईˈ करते हैं ये लोग, फिर चाटने लगते हैं पत्थर, थूक से सुलझाते हैं सैंकड़ों साल पुराना राजˌ
महीनों खुदाईˈ करते हैं ये लोग, फिर चाटने लगते हैं पत्थर, थूक से सुलझाते हैं सैंकड़ों साल पुराना राजˌ

दुनिया कई साल पुरानी है. लाखों-करोड़ों साल पहले दुनिया कैसी थी, आज इसका एक अंदाजा हमें है. हमने कभी भी डायनासोर को जीवित नहीं देखा. लेकिन वो मौजूद थे, इसका विश्वास है. इसके अलावा भी कई सभ्यताएं या कई तरह के जानवर जो अब विलुप्त हो चुके हैं, वो भी एक समय में धरती पर मौजूद थे. इसका भी सबूत हमारे पास है. ये सबूत अक्सर जीवाश्म यानी फॉसिल के जरिये मिलता है.

पहले आपको बता दें कि फॉसिल सैंकड़ों साल से किसी चट्टान के नीचे दबे रहने से उस चीज का बना इंप्रिंट होता है. जब आर्कियोलॉजिस्ट खुदाई करते हैं तो कई बार उन्हें ऐसा पत्थर मिलता है, जिसपर किसी तरह का प्रिंट होता है. ये ही फॉसिल होता है. देखने में ये किसी आम पत्थर की तरह लगता है लेकिन एक्सपर्ट्स की पारखी नजर उसमें से फॉसिल को छांट लेती है. नजर के अलावा एक और ट्रिक है, जिसके जरिये वो फॉसिल की पहचान करते हैं. चाटकर. जी हां, सही पढ़ा आपने. कैसे काम करती है ये ट्रिक, आइये जानते हैं.

थूक से खुलता है राज
सैंकड़ों साल पुराने राज को जानने के लिए एक्सपर्ट्स किसी जगह की कई महीने खुदाई करवाते हैं. इसके बाद जब उन्हें ऐसा लगता है कि उनके सामने पड़ी चीज बेशकीमती फॉसिल हो सकता है तो उसे टेस्ट करने के लिए वो अनोखा तरीका अपनाते हैं. वो उस पत्थर जैसी चीज को जीभ से चाटते हैं. अब आपको बताते हैं इससे कैसे खुलता है राज? दरअसल, अगर वो मात्र एक नॉर्मल पत्थर है तो जीभ आसनी से पत्थर के ऊपर से सरक जाता है लेकिन अगर वो एक फॉसिल है तो वो आपके थूक को सोख लेगा और आपको ऐसा लगेगा कि पत्थर आपकी जीभ को खींच रहा है. इस तरह से बेहद आसानी से एक्सपर्ट्स फॉसिल की पहचान कर लेते हैं.

बेहद काम की है ट्रिक
दरअसल, जब किसी जगह की खुदाई होती है तो वहां से कई सैंपल टेस्ट के लिए उठाए जाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसमें काफी पैसे खर्च होते हैं. ऐसे में एक्सपर्ट्स की कोशिश होती है कि वो सिर्फ काम की चीजें ही अपने साथ ले जाएं. चूंकि, पत्थर और फॉसिल एक जैसे ही दिखते हैं, ऐसे में कहीं वो सिर्फ पत्थर ही साथ ना ले कर चले जाएं इस कारण स्पॉट पर जीभ से चाटकर ये टेस्ट किया जाता है. ऐसे में वो बेकार चीजें अपने साथ ले जाने से बच जाते हैं. अभी तक ऐसे कई फॉसिल्स इस ट्रिक से ढूंढे गए हैं, जिन्होंने मानव सभ्यता को एक नया अध्याय दिया है.

me.sumitji@gmail.com

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