
ईरानी जहाज ‘IRIS DENA’ भारत द्वारा आयोजित मिलन बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। बीते सप्ताह अमेरिका ने उस पर हमला कर कर दिया। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए।
US-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बीते 10 दिनों से जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान सुर्खियों में हैं। मंगलवार को युद्ध के ‘लगभग खत्म’ होने की बात करने वाले ट्रंप ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसकी खूब निंदा हो रही है। जंग के बीच बीते सप्ताह अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा हमला कर ईरानी युद्धपोत ‘IRIS DENA’ को डुबोए जाने को लेकर ट्रंप ने अजीबोगरीब बयान दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी सेना ने उनसे कहा था कि जहाजों को पकड़ने से ज्यादा मजेदार है, उन्हें तबाह कर देना या डुबोना। ट्रंप ने अमेरिकी सेना के साथ बातचीत के बारे में बताते हुए कहा, “उन्होंने कहा, उसे डुबोना ज्यादा मजेदार है। उन्हें उसे डुबोना ज्यादा पसंद है। वे कहते हैं कि उसे डुबोना ज्यादा सुरक्षित है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मुझे लगता है कि यह शायद सच है।”
मारे गए थे 87 ईरानी सैन्यकर्मी
गौरतलब है कि ईरानी युद्धपोत ‘IRIS DENA’ भारत की मेजबानी में आयोजित ‘मिलन’ बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए। ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की थी और जवाब देने की कसम खाई थी। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने एक बयान में कहा था कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून का ‘मनमानी’ तरीके से उल्लंघन किया है। खतीबजादेह ने चेतावनी दी कि ‘बिना शस्त्र वाले जहाज’ पर हमले की सजा जरूर दी जाएगी।
46 जहाजों को मार गिराने का दावा
वहीं ट्रंप ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों के बारे में बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि यह ऑपरेशन एपिक फ्यूरी तेहरान के सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को एक जोरदार झटका दे रहा है। ट्रंप ने कहा, “अब हर कोई इसे समझता है। अपने इजरायली पार्टनर्स के साथ मिलकर, हम तकनीकी कौशल और सैन्य ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन करके दुश्मन को कुचल रहे हैं।” इस दौरान ट्रंप ने यह दावा भी किया कि ईरान की ड्रोन और मिसाइल कैपेबिलिटी को खत्म किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा, “ईरान की ड्रोन और मिसाइल कैपेबिलिटी को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है। ईरान की नेवी खत्म हो गई है। सब समुद्र की तलहटी में पड़ा है। 46 जहाज। क्या आप यकीन कर सकते हैं?”
जयशंकर ने दिया था विस्तृत ब्यौरा
इस बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर रूकने की अनुमति देने के भारत के फैसले पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि यह विशुद्ध कानूनी जटिलताओं से परे मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय है। जयशंकर ने बीते शनिवार को प्रतिष्ठित रायसीना डायलाॅग के अंतिम दिन ‘हिन्द महासागर का भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा में हिस्सा लेते हुए सवालों के जवाब में कहा कि ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने का निर्णय विशेष परिस्थितियों और मानवीय आधार पर लिया गया है और इसे कानूनी बारीकियों में नहीं तोला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईरान के तीन युद्धपोत आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लावन और आईआरआईएस बुशहर पिछले महीने विशाखापत्तनम में नौसेना के अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा समारोह तथा मिलन अभ्यास में शामिल होने आए थे और बाद में हिन्द महासागर में थे। विदेश मंत्री ने कहा ,”जहां तक जहाज़ के अंदर आने की इच्छा का सवाल है, वे कठिनाइयों में थे। मुझे लगता है कि मानवीय दृष्टिकोण से उनकी मदद करना सही था। हमने इस मामले को सरल रुप में और मानवता के नजरिए से देखा ना कि केवल कानूनी मुद्दों के दृष्टिकोण से।” उन्होंने कहा कि भारत की तरह श्रीलंका ने भी ईरान के युद्धपोत को डॉक करने की अनुमति दी है।



