इजरायल ग्रेटर इजरायल बनाने का ख्वाब देखता रह गया। लेकिन दूसरी तरफ ग्रेटर ईरान बनता चला जा रहा है। ऐसा ही कुछ होता नजर आ रहा है और बहुत तेजी से हो रहा है। इराक में मौजूद अमेरिकी बेस का है। जैसा कि दावा किया जा रहा है और ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने बाकायदा इस वीडियो को शेयर किया है और यह दावा किया जा रहा है कि इराक में जो इस्लामिक रेजिस्टेंस है उसने इस वीडियो को जारी किया है और बताया जा रहा है कि ये इराक का अमेरिका के जरिए ऑपरेट किया जाने वाला विक्टोरिया बेस है जो कि बगदाद में है। एक ड्रोन जिस पर कि कैमरा लगा हुआ है इस बेस के चप्पे-चप्पे की तस्वीरें दिखा रहा है। इसके बाद पहले एक अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पर ये कैमरा नजर डालता है और उसके बाद पहले एक अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को दिखाता है और फिर अचानक एक धमाका रिकॉर्ड भी करता है। ये धमाका होता है और उसके बाद फिर तेजी से यह अपने दूसरे टारगेट की तरफ बढ़ता है। जहां पर अमेरिकी एयरफोर्स के 2 हेलीकॉप्टर हुए हैं। इस्लामिक रेजिस्टेंस जो कि इराक में मौजूद है उनका ड्रोन है और दो हेलीकॉप्टर खड़े हुए हैं और उन हेलीकॉप्टर को टारगेट करता है और उसके बाद में एक हेलीकॉप्टर को यह निशाने पर ले लेता है।
यह वीडियो जारी किया है हसदशाबी ने जिसे आमतौर पर पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स कहते हैं। यह पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स इस वक्त इराक में इस रूप में एक्टिव है कि ईरान, अमेरिका, इसराइल जंग के बहाने उसने इराक में अमेरिकी फर्सेस को टारगेट करना शुरू कर दिया है। बेसिस को टारगेट करना शुरू कर दिया है। और एक तरह से अमेरिका को अमेरिका की जो मौजूदगी है इराक के अंदर उसको खाली कराने की कोशिश पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स यानी हजद शाहबी ने शुरू कर दिया है। और कहा जा रहा है कि यह पिछले 20 साल में सद्दाम हुसैन की मौत के बाद से एक तरह से इराक को मुकम्मल आजादी देने जा रहा है। ऐसा भी दावा किया जा रहा है। क्योंकि सद्दाम हुसैन की मौत के बाद से अमेरिका वहां पर मौजूद है। ना सिर्फ अमेरिका मौजूद है बल्कि नेटो मौजूद है और नाटो के करीब डेढ़ लाख फौजी अमेरिका और नाटो के वहां पर मौजूद थे। लेकिन धीरे-धीरे हज शाबी एक्टिव होता है। 2014 में इसका गठन किया जाता है। ़
आयतुल्लाह सिस्तानी के फतवे पर खासतौर से आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट को वहां से खदेड़ने के लिए इसका जिसे दाइश भी कहा जाता है। उसका गठन होता है और बहुत बहादुरी से पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स उसका मुकाबला करते हैं। इराक से उन्हें खदेड़ते हैं। यानी दाइश को खदेड़ते हैं। और उसके बाद पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स को इराक के अंदर एक संवैधानिक मान्यता मिल जाती है। खासतौर से उन्हें एक सुरक्षा बल के तौर पर मान्यता मिल जाती है जो सीधे वहां के प्राइम मिनिस्टर को रिपोर्ट करता है। इसके बाद से ये इल्जाम लगने लगा कि ईरान इराक के अंदर बहुत ज्यादा बहुत तेजी से अपनी घुसपैठ बना रहा है। उसकी वजह भी है। देखिए इराक में दो प्रमुख तीर्थ दो प्रमुख शाइन है। एक कर्बला और एक नजफ हजरत अली का अशरा नजफ में है और इमाम हुसैन का कर्बला में जो ईरान की बहुसंख्यक आबादी के लिए बहुत ही बहुत खास हो जाता है और जो सालाना तीर्थ यात्रा होती है ईरानियों की और पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों की वो वहां पर होती है जिसे अरबन कहा जाता है।
अरबन के दौरान भी आईएसआईएस ने काफी हमले किए पहले और इस यात्रा को रोकने के लिए इस सफर को कहीं ना कहीं डिस्ट्रॉय करने की कोशिश की। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लेकिन इसी हसद शाबी ने ईरान के सपोर्ट से उन्हें मात दी। उन्हें खदेड़ा और इस पूरी यात्रा की इस पूरे सफर की सुरक्षा का जिम्मा लिया जो इराकी बलों के बस की बात नहीं थी। तब से एक भरोसा पैदा हुआ और आज वही हसद शाबी ईरान का साथ दे रहा है इराक के अंदर में अमेरिकी फर्सेस को खदेड़ने के लिए। जब जंग शुरू भी नहीं हुई थी तो बहुत सारे दावे एक्सपर्ट करते थे कि सीधे तौर पर अगर हमला होगा ईरान पर तो इराक से होगा। एंट्री कराई जाएगी अमेरिकी फर्सेस की पैदल खासतौर से तो वो इराक से कराई जाएगी। तो इसी हद शाबिया पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स ने अमेरिका के उन सारे मसूबों पर पानी फेर दिया जो इराक के जरिए ईरान पर करना चाहता था। आज की डेट में हमला इराक से अमेरिका नहीं कर पा रहा है। बल्कि ये खबरें आ रही है या इस तरह के दावे किए जा रहे हैं कि अमेरिकन फोर्सेस नेटो की फर्सेस इराक से अपना बोरिया बिस्तर बांध रही हैं। आप सोचिए जंग के बीच से वो पीछे हट रहे हैं।
खासतौर से इराक में और इस वक्त यह भी कहा जाता है। ये भी दावा किया जाता है कि इराक की जो गवर्नमेंट है वो पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स यानी हजदुश शाबी को सपोर्ट कर रही है। उनका साथ दे रही है। यह दावे किए जाते हैं और एक मुकम्मल आजादी की सोच के साथ 2004 में नेटो समेत अमेरिकी लीडरशिप में अमेरिकी फौजे बड़े पैमाने पर यहां पर तैनात थी। नेटो अमेरिकी लीडरशिप थी। डेढ़ लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक यहां तैनात थे। बाद में ये तादाद घटती चली गई। और आज की डेट में सिर्फ 2500 सैनिक वहां पर बचे हुए हैं। इनमें नेटो मिशन इराक के तहत करीब 3000 से 4000 सैनिक हैं और अलग-अलग देशों से जो कि वहां पर मौजूद हैं। लेकिन तस्वीर बहुत तेजी से बदल रही है जैसा कि दावा किया जा रहा है और प्रो ईरानी जो फर्सेस हैं उन्होंने वहां पर बहुत भारी दबाव बनाकर रखा हुआ है। इस जंग के बहाने वो इराक को भी मुकम्मल तौर पर आजाद करा लेना चाहती हैं।



